गांधीनगर , फरवरी 24 -- गुजरात के मुख्य सचिव एम.के. दास की अध्यक्षता में मंगलवार को गांधीनगर में केन्द्र सरकार के महानिबंधक और जनगणना आयुक्त कार्यालय द्वारा आयोजित जनगणना-2027 के पहले चरण की तैयारियों के अंतर्गत गुजरात, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव के प्रिंसिपल सेंसस ऑफिसर्स की विशेष बैठक आयोजित की गयी।

श्री दास ने बताया कि जनगणना-2027 सटीकता, पारदर्शिता और डिजिटल गवर्नेंस में बेंचमार्क स्थापित करेगी। देश की जनगणना सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्यक्रम है। वर्ष 2027 की जनगणना अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रत्येक नीति-निर्णय के लिए ये आंकड़े हमारे राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक बनेंगे। राज्य के शहरी क्षेत्रों में जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है, इसलिए आगामी विकासोन्मुखी कार्यों में ये आंकड़े आधारभूत सिद्ध होंगे। पहले इस प्रक्रिया में तीन से चार वर्ष लगते थे, लेकिन डिजिटल टूल्स के उपयोग से इस प्रक्रिया को गति मिलेगी।

उन्होंने कहा कि जनगणना-2027 केवल एक वैधानिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि वह आधार है, जिस पर राष्ट्र के भविष्य की योजना, जनहितोन्मुखी योजनाओं के लक्ष्य तथा विकास की रणनीतियां निर्भर रहेंगी। इसमें राज्य के प्रत्येक जिले तथा शहरी स्तर पर जिम्मेदारी के साथ सूक्ष्म योजना बनाना आवश्यक है। उन्होंने जोड़ा कि राज्य सरकार सर्वोच्च प्रशासनिक तैयारी के साथ जनगणना-2027 को सफलतापूर्वक संपन्न करने के लिए प्रतिबद्ध है।

भारत के महानिबंधक और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने बताया कि भारत में पहली समकालीन जनगणना वर्ष 1881 में की गयी थी और उसके बाद वर्ष 2011 तक प्रत्येक 10 वर्ष में जनगणना लगातार होती रही है। उन्होंने जनगणना की रणनीति, रोडमैप, कार्यप्रणाली और डिजिटल पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि जनगणना की सफलता जिला कलेक्टरों और महानगर पालिका आयुक्तों के सक्रिय नेतृत्व, समर्थन और निरंतर निगरानी पर निर्भर करती है। इसलिए उन्होंने सभी अधिकारियों को इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया।

राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ जयंती रवि ने बताया कि इस बार महानिबंधक के कार्यालय द्वारा पूरे देश के लिए कई नयी पहलें की गयी हैं। टेक्नोलॉजी का व्यापक उपयोग करके जनगणना का कार्य किया जाएगा, जो वास्तविक समय में पारदर्शिता लाएगी और डेटा का विभिन्न तरीकों से विश्लेषण आसान बनेगा। उन्होंने कहा कि पहली बार मकान सूचीकरण चरण में भी डिजिटल स्व-गणना की सुविधा प्रस्तुत की जाएगी, जिसमें नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर उन्हें इस कार्य का महत्वपूर्ण भागीदार बनाने का प्रयास किया जाएगा।

गुजरात के जनगणना निदेशक सुजल मायात्रा ने बताया कि जनगणना की प्रक्रिया विश्व की सबसे बड़ी और जटिल प्रशासनिक प्रक्रियाओं में से एक है, जो भारत की संस्थागत मजबूती को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक 10 वर्ष में देश की जनसंख्या के सांख्यिकीय आंकड़ों की गणना की जाती है, जो संसाधनों के वितरण, शहरी नियोजन, कल्याणकारी योजनाओं और लक्षित हस्तक्षेपों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। आगामी 2027 की जनगणना विशेष इसलिए है, क्योंकि यह डेटा-आधारित और टेक्नोलॉजी-सुसज्जित काल में हो रही है।

इस बैठक में सामान्य प्रशासन विभाग की सचिव आर्द्रा अग्रवाल ने कार्यक्रम की तैयारियों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। इसके अलावा, बैठक में गुजरात के जनगणना निदेशक कार्यालय द्वारा विभिन्न प्रशासनिक और तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत प्रस्तुति के साथ विशेष चर्चा की गयी। इसमें एचएलओ फेज-I के अंतर्गत राज्य में मकानों, आवासीय इकाइयों और घरों की विस्तृत सूची तैयार करने की योजना, प्रशिक्षण, कर्मचारियों की नियुक्ति तथा डिजिटल स्व-गणना की सुविधा जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

उल्लेखनीय है कि 2027 की जनगणना दो चरणों में आयोजित होगी, जिसमें पहले चरण में घर सूचीकरण और आवास जनगणना होगी, जबकि दूसरे चरण में जनसंख्या गणना की जायेगी। गुजरात में एचएलओ की प्रक्रिया आगामी अप्रैल-मई 2026 के दौरान शुरू होगी, जिसमें नागरिकों को ऑनलाइन स्वयं जानकारी भरने की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।

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