रांची , फरवरी 01 -- भाकपा-माले की झारखंड राज्य कमिटी ने केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए बजट 2026-27 को गरीबों और आम लोगों के मोदी सरकार का हमला बोला है और इसे पूरी तरह से कॉरपोरेट परस्त करार दिया है।

पार्टी के राज्य सचिव कॉ. मनोज भक्त ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बजट देश की अधिसंरचना और सार्वजनिक संपत्ति को प्रधानमंत्री के चहेते पूंजीपतियों के स्वार्थपूर्ति करने में मददगार साबित होगा।

सरकार राजस्व घाटे को कम करने का बहाना बनाकर सार्वजनिक क्षेत्र की जमा पूंजी और बुनियादी ढांचे का तेजी से विनिवेश कर रही है। कनेक्टिविटी के नाम पर रेल, जहाजरानी और वायु-परिवहन में जिस पूंजीगत निवेश की बात की जा रही है, उसका असली मकसद सरकारी खजाने से अडाणी जैसे बड़े बड़े कॉरपोरेट घरानों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है। यह जनता के पैसे से निजी मुनाफाखोरी का मॉडल है।

बजट में ग्रामीण रोजगार की रीढ़ मनरेगा को समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं। कृषि क्षेत्र में दी जाने वाली सब्सिडी में भारी कटौती कर सरकार ने किसानों को कॉरपोरेट के रहमोकरम पर छोड़ दिया है। एक तरफ बेरोजगारी चरम पर है, वहीं दूसरी तरफ रोजगार सृजन के लिए बजट में कोई ठोस प्रावधान नहीं है।

मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों को टैक्स में राहत के नाम पर सिर्फ निराशा मिली है। शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए बजट आवंटन में गरीब और वंचित तबके को 'अंगूठा' दिखा दिया है।

राज्यों को राज्य के संसाधनों जैसे खनिज-टैक्स आदि में उचित हिस्सेदारी अभी भी कानूनी पचड़े में फंसी हुई है और ऊपर से मोदी ने राज्यों पर खर्च का बोझ लगातार बढ़ाया है. दूसरी ओर राज्यों को राहत देने के बजाय, केंद्र सरकार उन्हें ब्याज रहित लोन का 'झुनझुना' थमा रही है। यह संघवाद पर हमला है।

भाकपा-माले इस कॉरपोरेट परस्त बजट के खिलाफ झारखंड के गांव-गांव में जन-जागरण अभियान चलाएगी और जनता को केंद्र की इन विनाशकारी नीतियों के विरुद्ध गोलबंद करेगी।

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