चेन्नई , फरवरी 25 -- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के दिग्गज नेता आर नल्लाकन्नू का बुधवार को चेन्नई के राजीव गांधी सरकारी सामान्य अस्पताल में दोपहर दो बजे निधन हो गया।

वह 101 वर्ष के थे और उन्हें एक फरवरी को उच्च रक्त चाप, गुर्दों की बीमारियों और खाना निगलने में तकलीफ के कारण आईसीयू में भर्ती कराया गया था।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन और भाकपा राज्य सचिव वीरपांडियन नियमित रूप से अस्पताल जाकर डॉक्टरों से उनकी स्वास्थ्य की जानकारी ले रहे थे। इन दोनों ने श्री नल्लाकन्नू के निधन पर दुख जताया और इसे भारतीय कम्युनिस्ट आंदोलन के लिए एक बड़ा नुकसान बताया।

इन दोनों नेताओं के अलावा भी विभिन्न दलों के नेताओं ने उनके निधन पर दुख जताया और मजदूरों, दबे-कुचले तबके के लोगों और किसानों के लिए उनकी की गयी बड़ी सेवाओं को याद किया।

सम्मानित नेता और स्वतंत्रता सेनानी कॉमरेड नल्लाकन्नू, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी मजदूरों और किसानों की भलाई और उनके अधिकारों के लिए संघर्ष में लगा दी थी ।थूथुकुडी जिले के तिरुवैकुंटम के रहने वाले नल्लाकन्नू तमिलनाडु में भाकपा के सबसे बड़े नेताओं में से एक थे और कई दशकों तक सक्रिय रूप से वामपंथी आंदोलनों से जुड़े रहे। वे कई बार जेल भी गये।

1925 में जन्मे नल्लाकन्नू 15 साल की उम्र में कम्युनिस्ट आंदोलन में शामिल हो गये थे और उन्होंने मजदूरों के अधिकारों के लिए कई विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। अपनी साधारण जीवनशैली के लिए मशहूर श्री नल्लाकन्नू कई सालों तक भाकपा के तमिलनाडु राज्य सचिव रहे।

वह एक्शन फोर्स से जुड़े थे और उन्हें 14 साल से ज्यादा की जेल की सजा हुई थी। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से पार्टी का समझौता होने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। वह करीब सात साल जेल में रहे। विरोधी पार्टियों में भी उनका बहुत सम्मान था।

उनके खास योगदानों में राज्यों के बीच नदी के पानी के झगड़ों, खासकर कावेरी मुद्दे पर लगातार अभियान चलाना शामिल था, जहां उन्होंने तमिलनाडु के किसानों के लिए पानी के बराबर बंटवारे की लगातार वकालत की।

वह थमिराबरानी नदी के किनारे रेत खनन के भी खिलाफ थे और उन्होंने नदी से रेत निकालने पर पांच साल के लिए कानूनी रोक लगाने की मांग की थी। 2018 में उन्होंने अकेले मदुरै में एक केस लड़ा और उच्च न्यायालय से जीते, जिसने उनके अपने इलाके की थामिराबरानी नदी से रेत निकालने पर रोक लगा दी। उन्होंने कई भूख हड़तालें कीं, जिनमें से कुछ 20 दिनों से ज्यादा चलीं। एक बार सरकार ने उनकी भूख हड़ताल की वजह से एक बांध बनाया।

आपातकाल (1975-77) के दौरान उन्हें अपनी राजनीतिक गतिविधियों के लिए जेल में डाल दिया गया था। इन सालों में उन्हें कई सम्मान मिले। इसमें 2022 में तमिलनाडु सरकार का 'थगैसल तमिझार' अवॉर्ड भी शामिल है।

1999 में नल्लाकन्नू ने कोयंबटूर सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन भाजपा के सी पी राधाकृष्णन से हार गये थे। श्री राधा कृष्णन वर्तमान में भारत के उपराष्ट्रपति हैं।

श्री नल्लाकन्नू की पहचान जानदार वक्ता और महान समाज सुधारक की भी है। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी समाज में सबसे ज्यादा उत्पीड़ित समुदायों के लिए बराबर मौकों के लिए लड़ाइयां लड़ी। उन्होंने नांगुनेरी तालुक और आस-पास के गांवों में गरीब लोगों के रहन-सहन को बेहतर बनाने में भी काफ़ी योगदान दिया। उन्हें एक ऐसे इंसान के तौर पर जाना जाता है, जो जातिविहीन समाज के उसूलों को बनाये रखने के लिए कोई भी कुर्बानी देने को तैयार रहता है।

एक लेखक के तौर पर भी श्री नल्लकन्नू ने सामाजिक समस्याओं, भारत में नदियों के बीच आपसी संपर्क की संभावनाओं, कृषि सुधारों और कम्युनिस्ट आधारित लेखों पर कई किताबें लिखीं।

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