मुंबई , मार्च 14 -- भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने बदलते परिवेश में बाजारों में गति और स्थिरता में संतुलन को सुनिश्चित करने की जरूरत को रेखांकित किया है। उन्होंने कहा कि भारत के पूंजी बाजारों के विस्तार और मजबूती के साथ इनके काम का परिवेश बदल गया है क्योंकि वैश्विक घटनाओं से इनका जुड़ाव बढ़ा है ।

श्री पांडे यहां एक मीडिया हाउस के संवाद कार्यक्रम के एक सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दक्षता वित्तीय प्रणाली में भरोसे की नींव है। इसके बिना पूंजी आगे बढ़ने में हिचकिचाती है। उन्होंने पश्चिम एशिया संकट से बाजारों में गिरावट के इस दौर में खुदरा निवेशकों को धैर्य रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि भारतीय बाजारों में गहराई आ रही है और इनमें विविधता आ रही है तथा बाजार पहले से अधिक मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इन बाजारों के विस्तार और इनमें जटिलताएं बढ़ने के साथ वैश्विक घटनाओं से इनका जुड़ाव भी बढ़ रहा है और इससे " हमें उस बदलते परिदृश्य का सामना करना पड़ता है जिसमें आज के बाजार काम कर रहे हैं।"उन्होंने कहा कि अनिश्चित दुनिया में कुशल पूंजी बाजार स्थिरता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और "ये हमें पारदर्शी तरीके से मूल्य का पता लगाने में सक्षम बनाते हैं, व्यापक वित्तीय प्रणाली को अस्थिर किए बिना झटकों को सहने में मदद करते हैं। और शायद सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये निवेशकों का विश्वास बनाए रखते हैं।" उन्होंने कहा कि कुशल बाजार "दक्षता वित्तीय प्रणाली में भरोसे की नींव है। इसके बिना पूंजी आगे बढ़ने में हिचकिचाती है।" उन्होंने कहा कि बाजार पर वैश्विक घटनाओं के त्वरित प्रभाव और सूचना एवं डिजिटल प्रौद्योगिकी आधारित कारोबार के बीच नीति नियामकों के समक्ष चुनौती गति और स्थिरता में संतुलन सुनिश्चित करने की है।

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