मुंबई , फरवरी 24 -- मराठा आरक्षण के लिए हैदराबाद गजट लागू करने के मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। इस मुद्दे ने राजनीतिक बहस को फिर से शुरू कर दिया है जिसमें राज्य सरकार पर जरूरी प्रक्रिया तय करने में देरी संबंधी सवाल उठ रहे हैं।
पिछले साल मनोज जरांगे के नेतृत्व में इसे लेकर मुंबई में बड़ा आंदोलन हुआ था। तब सरकार ने भरोसा दिया था कि हैदराबाद गजट तुरंत लागू किया जायेगा, ताकि मराठा समुदाय के लोगों को ओबीसी प्रमाणपत्र मिलने में आसानी हो। लेकिन छह महीने बाद भी सरकार ने इसके लिए जरूरी नियम और ढांचा तैयार नहीं किया है।
सरकार ने 20 फरवरी के जारी आदेश में अपनी गलती मानते हुए स्वीकार किया है कि स्पष्ट प्रक्रिया न होने से बहुत कम आवेदन मिले और कम प्रमाणपत्र जारी हुए। इस स्वीकारोक्ति के बाद सरकार की आलोचना तेज हो गयी है।
इस देर को सुधारने के लिए अब संभाजीनगर मंडल आयुक्त कार्यालय की देखरेख में एक नयी समिति बनी है। यह समिति परिचालन दिशा-निर्देश तैयार करेगी। इसके बाद यह मसौदा राज्य सरकार को मंजूरी के लिए भेजा जायेगा। मंजूरी मिलते ही प्रमाणपत्र बांटने के काम में तेजी आने की उम्मीद है।
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