नयी दिल्ली , दिसंबर 29 -- राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन - एनएमसीजी की कार्यकारी समिति की सोमवार को 68वीं बैठक हुई जिसमें गंगा और उसकी सहायक नदियों में अविरल और निर्मल प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए कई महत्चपूर्ण निर्णय लिए गये।

बैठक में निर्णय लिया गया कि गंगा बेसिन में लुप्तप्राय पक्षियों के संरक्षण के लिए, भारतीय स्किमर प्रजाति के पक्षी सहित रेत के टीलों पर घोंसला बनाने वाले पक्षियों के प्रजनन स्थलों की सुरक्षा हेतु नयी परियोजना को स्वीकृति दी गई। नमामि गंगा मिशन द्वितीय चरण के अनुरूप यह परियोजना दीर्घकालिक निगरानी, सामुदायिक भागीदारी और साक्ष्य-आधारित संरक्षण पर केंद्रित है। परियोजना के तहत चंबल नदी और निचली गंगा में घोंसलों की निगरानी जारी रहेगी और बिजनौर, नरोरा और प्रयागराज में भी इसे आरंभ किया जाएगा।

अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना पक्षियों की प्रजाति के संरक्षण पर केंद्रित पहली विशिष्ट पहल है। साथ ही यह डॉल्फ़िन, मछलियों, कछुओं, मगरमच्छों आदि पर एनएमसीजी के काम की पूरक होगी और नदी से संबंधित जीव-जंतुओं की जैव विविधता पर केंद्रित कार्य पूरा करेगी।

बैठक में गंगा बेसिन वाले राज्यों में विभिन्न परियोजनाओं के सफल कार्यान्वयन और सुचारू संचालन के लिए संशोधित प्रशासनिक और व्यय स्वीकृतियां प्रदान की गईं जिनमें व्यावहारिक कार्यान्वयन चुनौतियों के समाधान और संसाधनों के कुशल उपयोग में मदद मिलेगी।

इस दौरान जिन परियोजनाओं के कार्यान्वयन को मंजूरी दी गयी है उनमें उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में 10 किलोलीटर क्षमता वाला मल-कीचड़ और सेप्टेज उपचार संयंत्र, कानपुर में मौजूदा सीवरेज अवसंरचना का पुनरुद्धार और मुख्य उप-स्टेशन का नवीनीकरण, वाराणसी में गंगा की सतह की स्वच्छता बनाए रखने के लिए ट्रैश स्किमर परियोजना, बिहार के दानापुर, फुलवारी शरीफ और फतुहा में अवरोधन और मोड़ तथा एसटीपी परियोजनाएं, झारखंड के फुसरो में अवरोधन और विपथन तथा सीवेज के सुरक्षित निपटान संबंधी एसटीपी परियोजना; और पश्चिम बंगाल के गार्डन रीच और कूरापुकुर में गंगा प्रदूषण नियंत्रण की दो प्रमुख परियोजनाओं में बदलाव शामिल हैं।

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