प्रयागराज , अप्रैल 25 -- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अप्रैल को उत्तर प्रदेश को गंगा एक्सप्रेस-वे की सौगात देने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल यह एक्सप्रेस-वे प्रदेश में बेहतर कनेक्टिविटी, औद्योगिक विकास और धार्मिक पर्यटन को नई गति देने वाला माना जा रहा है। वर्ष 2019 के कुंभ के दौरान आयोजित कैबिनेट बैठक में गंगा एक्सप्रेस-वे के निर्माण का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 दिसंबर 2021 को शाहजहांपुर में इस परियोजना का शिलान्यास किया था। गंगा एक्सप्रेस-वे शुरू होने के बाद प्रयागराज और मेरठ के बीच की लगभग 594 किलोमीटर की दूरी मात्र आठ घंटे में पूरी की जा सकेगी। यह एक्सप्रेस-वे मेरठ के बिजौली गांव से शुरू होकर प्रयागराज के जूड़ापुर दांदू गांव में समाप्त होगा।
यह एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के 12 जिलों और 518 गांवों से होकर गुजरेगा। इसके निर्माण से जिन क्षेत्रों से यह मार्ग गुजर रहा है, वहां विकास, व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। मेरठ की खेल नगरी को संगम नगरी प्रयागराज से जोड़ने के साथ-साथ यह एक्सप्रेस-वे धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा देगा। इसके माध्यम से लोग कानपुर और वाराणसी की ओर भी आसानी से जा सकेंगे। एक्सप्रेस-वे से उतरकर राष्ट्रीय राजमार्ग-330 के जरिए वाराणसी होते हुए कोलकाता तक पहुंचना भी सुगम होगा।
इस मार्ग से आने वाले श्रद्धालु प्रयागराज के संगम और अन्य धार्मिक स्थलों के अलावा वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ धाम, विंध्याचल धाम और चित्रकूट जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों तक भी सरलता से पहुंच सकेंगे। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा एक्सप्रेस-वे न केवल प्रदेश का अब तक का सबसे लंबा एक्सप्रेस-वे बनकर तैयार हुआ है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश की आर्थिक प्रगति की नई जीवनरेखा भी साबित होगा। इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद मिलेगी।
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