लखनऊ , फरवरी 1 -- भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी (भाकपा) (माले) ने संसद में पेश वर्ष 2026-27 के आम बजट को जनविरोधी, खोखला और निराशाजनक करार दिया है। पार्टी के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने कहा कि यह बजट मजदूरों, किसानों, युवाओं और महिलाओं की अनदेखी करता है तथा बढ़ती असमानता, बेरोजगारी और घटती क्रयशक्ति से निपटने का कोई ठोस उपाय प्रस्तुत नहीं करता।
उन्होंने आरोप लगाया कि बजट आदिवासियों व गरीबों के विस्थापन तथा पर्यावरण विनाश को बढ़ावा देने वाला है और 'विकसित भारत' की बात केवल खोखले दावों तक सीमित है। स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए आवंटन वास्तविक जरूरतों की तुलना में बेहद कम बताया गया है, जबकि कृषि क्षेत्र की समस्याओं और रोजगार संकट पर भी कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
माले नेता ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा, गरीबी उन्मूलन, जनस्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण अधोसंरचना को सशक्त करने वाली नीतियों की जरूरत है। उन्होंने मांग की कि सरकार ऐसी नीतियां लागू करे जो रोजगार की गारंटी दें और मजदूरों, किसानों व युवाओं की आर्थिक-सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करें।
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