कपूरथला , दिसंबर 11 -- कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने गुरुवार को पंजाब राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) की कड़ी आलोचना करते हुए उस पर क्षेत्र के सहायक निर्वाचन अधिकारी (एआरओ) को हटाने में जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाया है।

श्री खैरा ने आरोप लगाया कि एसईसी की निष्क्रियता के कारण एआरओ ने आगामी ब्लॉक कमेटी चुनावों के लिए कांग्रेस के छह उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों को खारिज कर दिया, जिससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि एसईसी ने 10 दिसंबर, 2025 को एक आदेश जारी कर भोलाथ के कार्यकारी अधिकारी-सह-एआरओ रणदीप वड़ैच को चुनाव संबंधी कर्तव्यों से हटा दिया। उन्होंने हालांकि तर्क दिया कि यह निर्णय बहुत देर से आया, क्योंकि वड़ैच नामांकन पत्रों की जांच पहले ही पूरी कर चुके थे, जिसके दौरान कांग्रेस के सभी छह उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित कर दिया गया था। आदेश के समय को 'शरारती और जानबूझकर विलंबित' बताते हुए, श्री खैरा ने दावा किया कि कांग्रेस के नामांकन पत्रों को खारिज करने का उद्देश्य 'पहले ही पूरा हो चुका है।' विधायक ने कहा कि विलंबित कार्रवाई से प्रशासनिक मिलीभगत या जानबूझकर की गयी लापरवाही का संकेत मिलता है। उन्होंने कहा कि एसईसी को 10 दिन पहले दर्ज की गयी शिकायत पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए थी, खासकर यह देखते हुए कि लुधियाना पश्चिम विधानसभा उपचुनाव के दौरान भारतीय निर्वाचन आयोग ने वड़ैच को पहले ही दोषी पाया था।

श्री खैरा ने सवाल उठाया कि एआरओ के दागदार रिकॉर्ड के बावजूद तत्काल कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गयी और नामांकन पहले ही खारिज हो जाने के बाद ही निष्कासन आदेश क्यों जारी किया गया। उन्होंने एसईसी से तत्काल स्पष्टीकरण की मांग करते हुए आरोप लगाया कि घटनाक्रम से देरी के पीछे संभावित राजनीतिक मकसद का संकेत मिलता है।

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