नयी दिल्ली , जनवरी 21 -- दिल्ली के ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने बुधवार को कृषि भूमि पर सौर संयंत्र लगाने की प्रक्रियाओं को सरल बनाने की घोषणा की।

श्री सूद ने आज बताया कि दिल्ली में वर्षों से जटिल भूमि नियमों के कारण सौर ऊर्जा की संभावना सीमित थीं। नए निर्देश के तहत किसान अब अपने खेतों में ऊपर सौर ऊर्जा सयंत्र से सौर ऊर्जा का उत्पादन करते हुए नीचे परंपरागत खेती जारी रखकर दोगुनी आय कमा सकेंगे। उन्होंने कहा की बहुत लंबे समय तक दिल्ली की ऊर्जा क्षमता वर्षों पुराने कानूनी जाल में फँसी रही। जब दुनिया केंद्रीयकृत ऊर्जा की ओर बढ़ रही थी तब दिल्ली के किसान ऐसी अनुमतियों का इंतज़ार कर रहे थे जो उनको कभी मिली ही नहीं। उन्होंने कहा कि आज हम 'नो ऑब्जेक्शन' की बाधाओं को समाप्त कर रहे हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में इस सरकार की दृष्टि बिल्कुल स्पष्ट और सरल है की दिल्ली का हर खेत केवल फसल ही नहीं, बल्कि हमारे शहर के भविष्य स्वच्छ ऊर्जा देने वाली बिजली भी पैदा करे।

श्री सूद ने आगे कहा , " जब भारत वैश्विक नवीकरणीय लक्ष्यों की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है, तब दिल्ली पीछे नहीं रह सकती। दिल्ली में पिछली सरकारें वर्षों तक बिना नतीजे के 'परामर्श' करती रहीं, जबकि हमने किसान के भूमि अधिकार का सम्मान करते हुए 21वीं सदी की तकनीक को अपनाने वाला समाधान दिया है। हम सौर ऊर्जा की दौड़ में 'सिर्फ एक और शहर' बनकर संतुष्ट नहीं हैं बल्कि हम चाहते हैं कि दिल्ली वह मानक स्थापित करे जिसे दुनिया के अन्य महानगर भी अपनाएँ।"ऊर्जा मंत्री ने यह भी बताया कि डीडीए, दिल्ली सरकार का विधि विभाग और राजस्व विभाग के साथ समन्वय कर वर्तमान सरकार ने रिकॉर्ड समय में कानूनी बाधाओं को दूर किया है, ताकि दिल्ली सबसे आगे रहे।

श्री सूद ने यह भी कहा की यह सुधार दिल्ली को "सोलर हब" में बदलने की व्यापक रणनीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। सौर ऊर्जा को अंतिम छोर यानि हमारे किसानों तक पहुँचाकर दिल्ली सरकार यह सिद्ध कर रही है कि ऊर्जा समानता ही सामाजिक समानता की बुनियाद है।

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