जयपुर , फरवरी 08 -- राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने आश्वस्त करते हुए कहा है कि खेजड़ी संरक्षण के लिए शीघ्र कानून लाया जाएगा।

श्री शर्मा ने रविवार को यहां उनसे पर्यावरण प्रेमी संतों एवं प्रबुद्धजनों ने मुलाकात की और खेजड़ी संरक्षण के लिए कानून लाए जाने की गई घोषणा पर उनका आभार व्यक्त किया। इस पर उन्होंने यह बात कही।

श्री शर्मा ने कहा कि हमारी सरकार खेजड़ी और पर्यावरण संरक्षण के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। हमने पर्यावरण प्रेमी संतों एवं प्रतिनिधियों से सुझाव लेते हुए खेजड़ी संरक्षण के लिए कानून बनाने का आश्वासन दिया था। इसी दिशा में हमने विधानसभा में घोषणा की है और संतों के सुझाव के अनुरूप ही इसकी प्रक्रिया जारी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी संस्कृति में वृक्षों, पहाड़ों और नदियों की पूजा की जाती है। हमारी संस्कृति में संतों-ऋषियों का भी विशेष महत्व है और ये समाज को सही मार्ग दिखाते हैं। बिश्नोई समाज ने विश्व को प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीने की प्रेरणा दी है।

उन्होंने भगवान जम्भेश्वर एवं मां अमृता देवी को नमन करते हुए कहा कि गुरु जम्भेश्वर द्वारा प्रतिपादित 29 नियम आज भी पर्यावरण सुरक्षा का अत्यंत प्रभावी मॉडल है। उन्होंने ''जीव दया पालनी, रुख लीलौ नहीं घावै'' के शाश्वत संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि जांभोजी ने हमें निरीह जीवों और पेड़ों की रक्षा को भी भक्ति के एक रूप में सिखाया। इसी तरह, मां अमृता देवी ने प्रकृति को मां का स्वरूप मानकर पर्यावरण की रक्षा और सम्मान करने की सीख दी है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक पेड़ मां के नाम अभियान से प्रेरणा लेकर हमारी सरकार ने वृक्षारोपण का महाअभियान चलाया और दो वर्षों में 20 करोड़ पौधे लगाए। हमारा लक्ष्य है कि पांच वर्षों में 50 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जाएं।

प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए संतों एवं प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री निवास पर श्री शर्मा से मुलाकात कर उनका आभार जताया। संतों ने कहा कि मुख्यमंत्री की यह श्रेष्ठ पहल ऐतिहासिक है। संतों के सान्निध्य में समाज के प्रबुद्धजनों ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया।

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