नयी दिल्ली , जनवरी 12 -- सब्जियों और दालों के दाम एक साल पहले की तुलना में दहाई प्रतिशत में घटने से दिसंबर 2025 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रास्फीति की दर 1.33 प्रतिशत पर नरम बनी रही।

इससे पहले, नवंबर में खुदरा महंगाई 0.71 प्रतिशत और अक्टूबर में 0.25 प्रतिशत दर्ज की गयी थी। वहीं, दिसंबर 2024 में यह 8.39 प्रतिशत रही थी।

खाद्य मुद्रास्फीति लगातार सातवें महीने शून्य से नीचे रही है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, फल, दूध, मांसाहार और खाद्य तेलों की कीमतों में अपेक्षाकृत अधिक वृद्धि के बावजूद सब्जियों और दालों की कीमतों में सालाना आधार पर दहाई अंक में बड़ी गिरावट के कारण खाद्य पदार्थों की महंगाई दर दिसंबर में शून्य से 2.71 प्रतिशत नीचे दर्ज की गयी। नवंबर में यह शून्य से 3.91 प्रतिशत नीचे थी जबकि दिसंबर 2024 में 5.22 प्रतिशत ऊपर दर्ज की गयी थी।

खुदरा महंगाई पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में सितंबर में किये गये सुधारों का असर भी देखा जा रहा है।

दिसंबर में सालाना आधार पर सब्जियों के दाम 18.47 प्रतिशत और दालों तथा उनके उत्पादों के 15.09 प्रतिशत घट गये। मसालों के दाम में 2.15 प्रतिशत और अनाजों में 0.35 प्रतिशत की नरमी रही।

तेल एवं वसायुक्त उत्पादों के दाम 6.75 प्रतिशत बढ़ गये। फलों की कीमतों में 6.66 फीसदी और मांस एवं मछलियों की कीमतों में 5.12 प्रतिशत की वृद्धि हुई। दिसंबर 2024 के मुकाबले दिसंबर 2025 में अंडों के दाम 4.76 प्रतिशत और चीनी तथा कंफेक्शनरी उत्पादों के 4.66 प्रतिशत बढ़े। दूध तथा डेयरी उत्पादों के दाम 2.56 फीसदी बढ़े।

जीएसटी सुधारों के कारण दिसंबर में सिले-सिलाये वस्त्रों की महंगाई दर 1.68 फीसदी के निचले स्तर पर रही। वहीं, जूते-चप्पलों के दाम सालाना आधार पर 0.43 प्रतिशत घटे हैं। आवास वर्ग की महंगाई दर 2.86 प्रतिशत और ईंधन एवं बिजली वर्ग की 1.97 प्रतिशत दर्ज की गयी।

सोने-चांदी की महंगाई दर दिसंबर में भी ऊंची बनी रही। एक साल पहले के मुकाबले चांदी 97.07 प्रतिशत और सोना 68.66 प्रतिशत महंगा हुआ है।

दिसंबर में ग्रामीण इलाकों में महंगाई दर 0.76 प्रतिशत और शहरी इलाकों में 2.03 प्रतिशत दर्ज की गयी।

खुदरा मुद्रास्फीति फिलहाल रिजर्व बैंक के दो से छह प्रतिशत के लक्षित दायरे से भी नीचे है। केंद्रीय बैंक को यह लक्ष्य केंद्र सरकार द्वारा दिया गया है। साथ ही उसे मध्यम अवधि में महंगाई दर को चार प्रतिशत के आसपास रखने की जिम्मेदारी दी गयी है।

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