गांधीनगर , दिसंबर 17 -- गुजरात में जामनगर के निकट स्थित खिजड़िया रामसर स्थल राज्य के महत्वपूर्ण पाकृतिक लैंडमार्क के रूप में उभरकर सामने आया है।

सूत्रों ने बुधवार को बताया कि कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्र आज राज्य के अग्रणी पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं, जहां प्राकृतिक लैंडस्कैप, वन्यजीवन, तटीय सुंदरता, आध्यात्मिक स्थलों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अनोखा संगम देखने को मिलता है। सफेद रण से लेकर सौराष्ट्र के तीर्थ स्थलों, समुद्र तट और अभयारण्यों तक की यात्रा पर्यटकों को विविधतापूर्ण और यादगार अनुभव देती है।

करीब 600 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैला खिजड़िया पक्षी अभयारण्य मीठे और खारे पानी के दुर्लभ संगम के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। यह अनोखा पारिस्थितिक तंत्र पक्षियों के लिए एक विविधतापूर्ण निवास उपलब्ध कराता है। गुजरात सरकार के वन एवं पर्यावरण विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023-24 के दौरान यहां 317 पक्षी प्रजातियां दर्ज की गई थी, जो 2024-25 में बढ़कर 332 हो गई है, जो इस अभयारण्य की लगातार विकसित होती जैव विविधता का प्रमाण है।

इस पारिस्थितिक समृद्धि को 2022 में वैश्विक मान्यता मिली, जब खिजड़िया को अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि के रूप में रामसर स्थल का दर्जा प्राप्त हुआ। राज्य सरकार यहां पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित कर रही है, जिसमें वॉच टावर, वन-कुटीर, पक्षी निरीक्षण प्लेटफॉर्म, इंटरप्रिटेशन सेंटर, सेल्फी पॉइंट और जानकारी देने वाले साइन बोर्ड शामिल हैं।

अभयारण्य की मुख्य ताकत इसके विविधतापूर्ण और सुरक्षित आवास स्थल में है, जहां मीठे पानी का बहाव समुद्री ज्वार के साथ मिलता है, और तटबंधों एवं खंदकों के नेटवर्क से यह और भी समृद्ध हो जाता है, जो वन्यजीवों के लिए आदर्श माइक्रोहैबिटेट यानी सूक्ष्म आवास बनाते हैं। ये सुविधाएं खिजड़िया को भारत के सबसे जीवंत पक्षी स्थलों में से एक बनाती हैं। साथ ही, यह आर्द्रभूमि (वेटलैंड) संरक्षण के प्रति गुजरात के वैज्ञानिक और योजनाबद्ध दृष्टिकोण को भी मजबूत बनाती है।

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