रांची , दिसंबर 30 -- झारखंड में धान अधिप्राप्ति को लेकर खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग की एक आपात समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने की।
बैठक में विभागीय सचिव उमाशंकर सिंह, एचडी शतरंज नारायण सिंह सहित राज्यभर के सभी जिला आपूर्ति पदाधिकारी (डीएसओ) उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य फोकस धान क्रय की प्रगति, किसानों को भुगतान और जिलावार प्रदर्शन की समीक्षा रहा।
बैठक में बताया गया कि 30 दिसंबर 2025 तक राज्य सरकार द्वारा धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य 60 लाख क्विंटल (6 लाख मीट्रिक टन) निर्धारित था। लक्ष्य के मुकाबले अब तक 8.55 लाख क्विंटल धान अतिरिक्त रूप से अधिप्राप्त किया जा चुका है, जो राज्य के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इस अतिरिक्त अधिप्राप्ति के विरुद्ध 1.12 लाख क्विंटल अग्रिम चावल प्राप्त हुआ है, जबकि 0.98 लाख क्विंटल धान राइस मिलों को भेजा गया है।
अधिकारियों ने बताया कि अतिरिक्त 8.55 लाख क्विंटल धान के एवज में किसानों को कुल 206.49 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना है। इसमें से अब तक 68.57 करोड़ रुपये की राशि किसानों के खातों में भेजी जा चुकी है। धान क्रय और भुगतान के इन रिकॉर्ड आंकड़ों से किसानों में व्यापक खुशी और संतोष का माहौल देखा जा रहा है।
मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों और अधिकारियों की सराहना की, वहीं गढ़वा, पलामू और रामगढ़ जिलों के कमजोर प्रदर्शन पर संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने सख्त शब्दों में कहा कि डीएसओ किसानों के प्रति पूरी तरह जवाबदेह बनें, किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डॉ. अंसारी ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि राज्य में पहली बार मात्र 15 दिनों में 33 प्रतिशत धान की खरीद पूरी की गई है। अब तक 81 करोड़ रुपये का धान क्रय हो चुका है, जो किसानों के लिए सकारात्मक संकेत है। उन्होंने उपायुक्तों को निर्देश दिया कि बैंकों के साथ बैठक कर भुगतान में हो रही देरी को तुरंत दूर करें।
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