पटना , अक्टूबर 31 -- खाकी वर्दी के साथ देश सेवा करने वाले पुलिस अधिकारी इस बार के विधानसभा चुनाव में खादी का रौब पाने के लिये बेताब नजर आ रहे हैं।
बिहार में पुलिस अधिकारियों के राजनेता बनने का सिलसिला काफी पुराना है। खाकी के प्रति आम लोगों में खासा आकर्षण देखा गया है। यही वजह है कि कई खाकीधारी अपनी बेहतर छवि का फायदा उठाकर जनप्रतनिधि बनने में कामयाब भी रहे हैं। विगत वर्षों में पुलिस सेवा से कई अवकाश प्राप्त अधिकारी देश की सबसे बड़ी पंचायत संसद की शोभा बढ़ा चुके हैं। इस बार वर्ष 2025 के चुनावी रण में भी कई ख़ाकीधारी चुनावी रण में कूदने को तैयार हैं और इस बार भी खाकी पर खादी का रंग चढ़ता दिखाई दे रहा है।
भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी और बिहार के 'सुपर कॉप' रहे शिवदीप लांडे जमालपुर और अररिया विधानसभा से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।वहीं ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बक्सर विधानसभा सीट पर इस बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के टिकट पर एनकाउंटर स्पेशलिस्ट और असम के सिंघम के नाम से मशहूर पूर्व आईपीएस अधिकारी आनंद मिश्रा चुनावी अखाड़े में जोर आजमा रहे है।
महाकवि आरसी प्रसाद सिंह ,उदयनाचार्य, पंडित सुरेंद्र झा सुमन जैसे दार्शनिकों और साहित्यकारों की धरती रोसड़ा (सुरक्षित) सीट से तमिलनाडु के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) वी.के.रवि कांग्रेस के टिकट पर चुनावी अखाड़े में उतरे हैं।
छपरा विधानसभा क्षेत्र से हिमाचल प्रदेश कैडर पूर्व आईपीएस अधिकारी जय प्रकाश सिंह चुनावी दंगल में भाग्य आजमां रहे हैं। दरभंगा से जमशेदपुर के पूर्व पुलिस अधीक्षक और बिहार के पूर्व महानिदेशक (होमगार्ड) राकेश कुमार मिश्रा (आर.के. मिश्रा)खाकी के बाद खादी में खादी का रौब पाने के लिये बेताब नजर आ रहे हैं।
भोरे (सुरक्षित) सीट से पूर्व मंत्री चंद्रिका राम के पुत्र और पूर्व आईपीएस अधिकारी और विधायक सुनील कुमार जदयू के टिकट पर दूसरी बार यहांजीत का परचम लहराने के लिये बेताब हैं।नोखा से सेवानिवृत्त पुलिस उपाधीक्षक नसरुल्ला खां जनसुराज के उम्मीदवार हैं। पूर्व डीआईजी राम नारायण सिंह राष्ट्रवादी जनलोक पार्टी (सत्य) के उम्मीदवार के रूप में बैकुंठपुर में जोर आजमाइश कर रहे हैं।श्री सिंह लम्बे समय से भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता थे लेकिन टिकट नही मिलने की वजह से विद्रोही स्वर के साथ मैदान में कूद गए हैं।
बदलते दौर की राजनीति में एक नया ट्रेंड भी देखने को मिल रहा है। सत्ता की ओर बढ़ते आकर्षण के साथ किसी ने वर्तमान व्यवस्था के साथ नाराजगी जताई तो किसी ने अवकाश ग्रहण के बाद राजनीति के क्षेत्र में कदम रखा। वैसे नौकरशाह या पुलिस अधिकारी जिनमें कुछ अलग करने की चाहत होती है, वे राजनीति का रुख कर रहे हैं।
बिहार में पूर्व आइपीएस अधिकारियों की एक लंबी फेहरिस्त है, जिन्होंने समाज से सीधे जुड़ने के लिए राजनीति में कदम रखा और खाकी से खादी के सफर पर चल पड़े। इनमें कई ऐसे पुलिस अधिकारी शामिल हैं, जिन्होंने इस क्षेत्र में सफलता भी पाई। इनमें सबसे पहला नाम दिल्ली के पूर्व पुलिस कमिश्नर और पूर्व मुख्यमंत्री सत्येंद्र नारायण सिंह के पुत्र निखिल कुमार का है, जिन्होंने राजनीति के मैदान में भी सफलता की नई इबारत लिखी है। सेवानिवृत्ति के बाद परिवार की राजनीतिक विरासत को संभालते हुए श्री कुमार वर्ष 2004 में कांग्रेस के टिकट पर औरंगाबाद के सांसद बने। बाद में वह केरल एवं नागालैंड के राज्यपाल भी बने।
पुलिस पदाधिकारी के रूप में लोकसभा के चुनावी जंग को जीत कर केन्द्रीय मंत्रिमंडल में जगह बनाने वालों में पूर्व पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) ललित विजय सिंह का नाम भी शामिल है। वर्ष 1989 के आमचुनाव में श्री सिंह ने जनता दल के टिकट पर बेगूसराय लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और कांग्रेस की दिग्गज कृष्णा सिंह को पराजित कर जीत हासिल की। पूर्व आईजी सैयद फजल अहमद भी वर्ष 1984 में मुंगेर संसदीय सीट से लोकसभा के चुनावी जंग में उतरे। उन्होंने जनता पार्टी (जेएनपी) के टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। पूर्व डीआईजी राजेन्द्र शर्मा ने वर्ष 1991 के लोकसभा चुनव में जहानाबाद संसदीय सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के टिकट पर किस्मत आजमायी। इस चुनाव में उन्हें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) उम्मीदवार रामाश्रय प्रसाद सिंह से हार का सामना करना पड़ा। उन्हें तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा।
पूर्व आईजी बलवीर चांद ने भी वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में गया (सुरक्षित) संसदीय सीट से अपनी किस्मत आजमाई। वह भाजपा के टिकट पर चुनावी रणभूमि में उतरे लेकिन उन्हें राष्ट्रीय जनता दल (राजद) उम्मीदवार राजेश कुमार मांझी से हार का सामना करना पड़ा। पूर्व डीजीपी ध्रुव प्रसाद ओझा (डीपी ओझा ) वर्ष 2004 में बेगूसराय लोकसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी बने, लेकिन जनता ने उन्हें नकार दिया। पूर्व डीजीपी आशीष रंजन सिन्हा ने वर्ष 2014 के आम चुनाव में नालंदा लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनावी रणभूमि में ताल ठोका लेकिन उन्हें भी पराजय का सामना करना पड़ा। वह तीसरे नंबर पर रहे।
पूर्व आईजी मनोहर प्रसाद सिंह ने वर्ष 2010 में जदयू के टिकट पर कटिहार के मनिहारी विधानसभा क्षेत्र से किस्मत आजमायी और विधायक बने।
झारखंड के पूर्व डीजीपी विष्णु दयाल राम (वी. डी. राम) ने वर्ष 2014 में भाजपा के टिकट पर पलामू संसदीय सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। वह पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक और भागलपुर के पुलिस अधीक्षक भी रहे हैं।
पूर्व आईपीएस अधिकारी डॉ. अजय कुमार ने जमशेदपुर सीट पर वर्ष 2011 के उपचुनाव में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) के टिकट पर चुनाव लड़ा और विजयी बने। वह पटना के पुलिस अधीक्षक (नगर) और जमशेदुपर के पुलिस अघीक्षक भी रहे चुके हैं। बाद में श्री कुमार कांग्रेस पार्टी में चले गएपूर्व आईपीएस अधिकारी डॉ. रामेश्वर उरांव वर्ष 2004 में झारखंड के लोहरदगा संसदीय सीट से कांग्रेस के टिकट पर रणभूमि में उतरे और विजयी रहे।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित