नैनीताल , फरवरी 09 -- उत्तराखंड के हल्द्वानी में क्रिकेट लीग के आयोजन के नाम पर कथित लाखों रूपये के फर्जीवाड़ा में गिरफ्तार विकास ढाका ने अपनी गिरफ्तारी को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। अदालत ने इस मामले में सोमवार को सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता से रिमांड सीट आगामी गुरूवार तक अदालत में पेश करने को कहा है।
आरोपी विकास ढाका की ओर से बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर कहा गया कि उस पर लगाये गये आरोप गलत हैं। उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार उसकी गिरफ्तारी गलत है। उच्चतम न्यायालय की सात साल से कम सजा के मामलों को गैर संज्ञेय अपराध घोषित किया गया है और इसलिये आरोपी की गिरफ्तारी गैर वाजिब है।
संज्ञेय मामलों में ही गिरफ्तारी की जा सकती है। उसमें भी आरोपी को गिरफ्तारी के संबंध में जानकारी दी जानी आवश्यक है। यह भी कहा गया कि पुलिस ने उसे एक दिन पहले थाना बुला लिया था जबकि गिरफ्तारी एक दिन बाद दिखायी गयी है।
याचिकाकर्ता आज अदालत में रिमांड सीट उपलब्ध कराने में नाकाम रहा। इसके बाद अदालत ने याचिकाकर्ता को गुरूवार तक रिमांड सीट पेश करने को कहा है। इस मामले में अब गुरूवार को सुनवाई होगी।
यहां बता दें कि आरोपी के खिलाफ हल्द्वानी में गौलापार अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम में एपिक विक्ट्री क्रिकेट लीग (ईवीसीएल) के आयोजन नाम पर फर्जीवाड़ा में काठगोदाम थाना में दो मामले दर्ज हैं। एक मामला सितारगंज के पूर्व विधायक नारायण पाल जबकि दूसरा मामला झज्जर हरियाणा के लाल सिंह कालोनी निवासी दुष्यंत शर्मा की ओर से दायर किया गया है।
दोनों की ओर से ईवीसीएल के नाम पर लीग के (आयोजक) आर्गेनाइजर विकास ढाका पर 32 लाख की धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है। इवीसीएल 01 फरवरी, 2026 से शुरू होनी थी। पूर्व विधायक श्री पाल की ओर से कहा गया कि उत्तराखंड सोल्जर्स टीम खरीदने के लिये आयोजकों के साथ 40 लाख में सौदा तय किया गया। उसने 03 लाख रूपये नकद जबकि 06 लाख रूपये होर्डिंग्स लगाने के नाम पर खर्च किये।
इसी प्रकार दूसरी शिकायत में कहा गया कि यूपी वारियर्स टीम के लिये उससे 30 लाख रूपये में सौदा किया गया। आयोजक को 23 लाख रूपये का भुगतान कर दिया गया लेकिन क्रिकेट लीग शुरू नहीं की गयी।
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