पुणे , जनवरी 16 -- पुणे और पिंपरी चिंचवड़ नगर निगम चुनावों में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के दोनों पवारों के बीच अंतिम समय में हुआ गठबंधन कोई खास असर नहीं दिखा पाया।
इस इलाके में राजनीतिक समीकरण तब बदले जब श्री अजीत पवार ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का फैसला किया और बाद में आखिरी समय में श्री शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा के साथ गठबंधन करने की इच्छा जताई। इस कदम ने उस मुकाबले में प्रतिस्पर्धा का तत्व जोड़ दिया जो शुरू में एक सीधा मुकाबला लग रहा था।
राकांपा का पारंपरिक रूप से पुणे के कई उपनगरीय इलाकों के साथ-साथ शहर के मुख्य क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में भी काफी प्रभाव रहा है। दोनों राकांपा गुटों के एक साथ चुनाव लड़ने से यह उम्मीद थी कि यह संयुक्त ताकत चुनावी फायदे में बदलेगी। इसके अलावा श्री अजीत पवार ने कई प्रभावशाली उम्मीदवारों को शामिल किया जिन्हें भाजपा ने टिकट नहीं दिया था और उन्हें उम्मीदवार बनाया, जिससे कड़ी टक्कर की उम्मीदें और बढ़ गईं।
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