रामनगर , फरवरी 02 -- उत्तराखंड में रामनगर के कॉर्बेट लैंडस्केप से होकर बहने वाली कोसी नदी में दुर्लभ सबसे बड़ी पलास गल के दिखने से पक्षी प्रेमियों और वन्यजीव विशेषज्ञों के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई है।

आमतौर पर बड़े जलक्षेत्रों में दिखाई देने वाला यह बड़ा पक्षी कोसी नदी में नजर आना क्षेत्र की जैव विविधता और इकोसिस्टम की मजबूती का अहम संकेत माना जा रहा है।

प्रसिद्ध पक्षी विशेषज्ञ सुमांता घोष ने आज इस अवलोकन की पुष्टि करते हुए बताया कि कोसी नदी में जो पक्षी देखा गया है, वह पलास गल है, जो गल प्रजाति का संभवत: बसे बड़ा पक्षी माना जाता है। उन्होंने बताया कि यह प्रजाति शीतकाल के दौरान मंगोलिया और मध्य एशिया के क्षेत्रों से प्रवास कर भारतीय उपमहाद्वीप में आती है, सर्दियों में यह पक्षी उत्तर भारत के कुछ चुनिंदा जलक्षेत्रों में देखा जाता है।

पक्षी विशेषज्ञ घोष ने कहा कि पलास गल आमतौर पर उन स्थानों पर अधिक पाई जाती है, जहां पानी का स्तर अपेक्षाकृत अधिक हो और खुले जलक्षेत्र मौजूद हों। गंगा बैराज जैसे बड़े जलाशयों और नदियों में इसकी उपस्थिति ज्यादा दर्ज की जाती है,कोसी बैराज में सामान्य तौर पर पानी का स्तर कम रहता है, इसलिए यहां इस प्रजाति का दिखना खास माना जा रहा है।

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