वाराणसी , दिसंबर 28 -- उत्तर प्रदेश में चर्चित कोडीन युक्त प्रतिबंधित कफ सिरप मामले में वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस ने रविवार को बड़ा खुलासा किया। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त नीतू कात्यायन ने बताया कि अवैध कफ सिरप तस्करी के मामले में दो अलग-अलग केस रोहनिया और सारनाथ थाने में दर्ज किए गए थे। दोनों मामलों में आपराधिक प्रवृत्ति एक जैसी पाई गई। इन मामलों में कुल पांच लोगों की गिरफ्तारी की गई है।
रोहनिया मामले में तीन लोग स्वप्निल केसरी, दिनेश यादव और आशीष यादव को गिरफ्तार किया गया है। सारनाथ मामले में दो लोग विष्णु पांडेय और लोकेश अग्रवाल की गिरफ्तारी हुई है। इन सभी आरोपियों का काम अवैध शेल कंपनियां खोलना था। इनके द्वारा खोली गई कंपनियों का जीएसटी नंबर लिया जाता था। ड्रग एजेंसी से लाइसेंस भी इनके द्वारा बनवाया गया था। लेकिन जांच में पता चला कि खरीद-बिक्री का काम किसी प्रकार से नहीं किया जाता था। ये कंपनियां केवल कागजों पर चलती थीं। झूठे जीएसटी बिल और इनवॉइस बनाए जाते थे।
बड़े वित्तीय लेन-देन किए जाते थे, जो वृद्धि कंपनी और शैली ट्रेडर्स को जाते थे। मुख्य सरगना शुभम जायसवाल और दिवेश जायसवाल के सहयोगियों की मदद से यह काम होता रहा है। अंतिम लेन-देन शुभम जायसवाल और उसके साथियों द्वारा बनाई गई कंपनियों में किया जाता था।
रोहनिया मामले में तीन फर्जी कंपनियां जांच में मिलीं-अल ऊकबा, एसबी फार्मा और सिंह मेडिकोज। इन कंपनियों में 13 करोड़ रुपये का फर्जी लेन-देन पकड़ा गया। इसी तरह सारनाथ की दो कंपनियों से करीब दस करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई। ये सभी शेल कंपनियां थीं, जो भौतिक रूप से सक्रिय नहीं पाई गईं। कफ सिरप बिहार, बंगाल और बांग्लादेश में कई गुना दामों पर भेजा जाता रहा है। वहां से मिलने वाले पैसे हवाला के माध्यम से वाराणसी में प्राप्त किए जाते थे। पूरा तस्करी रैकेट शुभम जायसवाल से जुड़ा था।
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