बेमेतरा , फरवरी 21 -- ) छत्तीसगढ़ में बेमेतरा जिले के ग्राम बीजाभाट में कोटवार की नियुक्ति को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर प्रशासनिक स्तर पर शुक्रवार को बड़ा फैसला सामने आया है। दुर्ग संभाग के आयुक्त ने तहसीलदार बेमेतरा तथा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बेमेतरा द्वारा पारित पूर्व आदेशों को निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही स्पष्ट किया गया है कि नियुक्ति की प्रक्रिया अब नए सिरे से और नियमानुसार पूरी की जाएगी।

गौरतलब है कि बेमेतरा तहसील के बीजाभाट ग्राम में कोटवार पद की नियुक्ति को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था। इस संबंध में तहसीलदार द्वारा पारित आदेश तथा एसडीएम बेमेतरा द्वारा 29 जनवरी 2024 को जारी आदेश को अपीलकर्ता ने चुनौती दी थी। प्रकरण अपील के रूप में दुर्ग संभाग के आयुक्त के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

आयुक्त ने 12 दिसंबर 2024 को सुनाए अपने निर्णय में पाया था कि तहसीलदार और एसडीएम द्वारा पारित आदेश विधिसम्मत नहीं थे। इस आधार पर दोनों आदेशों को निरस्त कर दिया गया।

हालांकि अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए आयुक्त ने तहसीलदार बेमेतरा को निर्देशित किया है कि यदि ग्राम बीजाभाट में कोटवार का पद रिक्त है, तो छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 230 के तहत निर्धारित प्रावधानों के अनुसार पात्र एवं योग्य अभ्यर्थी की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए।

यह मामला आगे चलकर राजस्व मंडल, छत्तीसगढ़ तक भी पहुंचा। यहां एक जुलाई 2025 को धारा 32 के अंतर्गत दायर स्थगन (स्टे) आवेदन को निरस्त कर दिया गया। साथ ही प्रकरण को अंतिम सुनवाई के लिए नियत किया गया है।

आयुक्त के आदेश के बाद तहसीलदार और एसडीएम के पूर्व आदेश प्रभावहीन हो गए हैं। अब कोटवार नियुक्ति की संपूर्ण प्रक्रिया विधि अनुसार नए सिरे से संचालित की जाएगी। अंतिम सुनवाई के निर्णय पर क्षेत्रवासियों की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि उसी के आधार पर आगे की प्रशासनिक दिशा तय होगी।

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