बैतूल , अप्रैल 6 -- मध्यप्रदेश के बैतूल नगर में कॉलोनियों में सार्वजनिक उपयोग के लिए छोड़ी जाने वाली जमीनों के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए नगर पालिका ने सख्त कदम उठाने की तैयारी की है। अब ऐसी 'रेस्ट ऑफ लैंड' को नगर पालिका अपने नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू करेगी, जिससे अवैध बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके।

नगर पालिका अधिनियम के अनुसार कॉलोनी विकास के दौरान कॉलोनाइजर को मंदिर, पार्क, खेल मैदान सहित अन्य सार्वजनिक उपयोग के लिए भूमि छोड़ना अनिवार्य होता है। हालांकि, कई मामलों में अनुमति के समय दर्शाई गई इन जमीनों को बाद में अवैध रूप से प्लॉट बनाकर बेच दिया जाता है, जिससे कॉलोनीवासियों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं।

सूत्रों के अनुसार, कॉलोनी नगर पालिका को हस्तांतरित होने के बाद भी इन जमीनों का स्वामित्व राजस्व अभिलेखों में कॉलोनाइजर के नाम बना रहता है। इसी का लाभ उठाकर इन भूखंडों की रजिस्ट्री कर दी जाती है। कई मामलों में समय रहते विरोध न होने से बाद में विवाद की स्थिति बन जाती है।

जिले की अनेक कॉलोनियों में ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जहां लोगों को पार्क, मंदिर और खेल मैदान जैसी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ा है। इससे नगर नियोजन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हुए हैं।

मुख्य नगर पालिका अधिकारी नवनीत पांडेय ने बताया कि इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए सभी वैध कॉलोनियों को नोटिस जारी किए गए हैं और नियमानुसार व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही मेंटेनेंस मद में ली जाने वाली राशि का त्रैमासिक विवरण भी मांगा गया है।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक उपयोग की भूमि वास्तव में नगर पालिका की संपत्ति होती है और शीघ्र ही इन्हें नगर पालिका के नाम दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही इन भूखंडों को संरक्षित कर नियोजित विकास कार्य कराए जाएंगे।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कहीं भी इन जमीनों पर अवैध कब्जा या निर्माण पाया जाता है, तो उसे हटाने की कार्रवाई की जाएगी। इस पहल से कॉलोनियों में नियोजित सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित होने और अवैध प्लॉटिंग पर अंकुश लगने की उम्मीद है।

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