रामनगर , मार्च 07 -- उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर में स्थित विश्व प्रसिद्ध जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क का ढिकाला पर्यटन जोन पर्यटकों के बीच इतना लोकप्रिय है कि यहां रात्रि विश्राम के लिए बने कमरे कभी खाली नहीं रहते। हालात यह हैं कि हर हफ्ते जैसे ही ऑनलाइन बुकिंग खुलती है, कुछ ही मिनटों में सभी कमरे फुल हो जाते हैं।
जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क का देश ही नहीं बल्कि विदेशों से आने वाले पर्यटक भी इस जोन में ठहरने का अनुभव लेने के लिए सालभर इंतजार करते हैं। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व का ढिकाला जोन हर साल 15 नवंबर से 30 जून तक पर्यटकों के लिए खुला रहता है, मानसून सीजन और सुरक्षा कारणों के चलते 30 जून के बाद इसे बंद कर दिया जाता है। जिसके बाद दोबारा 15 नवंबर को यह पर्यटकों के लिए खोल दिया जाता है लेकिन जैसे ही पर्यटन सीजन शुरू होता है, ढिकाला और इसके आसपास के सभी वन विश्राम गृहों के कमरे पूरे सीजन के लिए लगभग पैक हो जाते हैं।
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने आज बताया कि ढिकाला पर्यटन जोन सिर्फ उत्तराखंड या भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में वन्यजीव अवलोकन के लिए सबसे प्रसिद्ध स्थानों में से एक है। उन्होंने बताया कि जब भी 15 नवंबर से पर्यटन सीजन शुरू होता है, ढिकाला में रात्रि विश्राम के लिए पर्यटकों की भारी मांग देखने को मिलती है, हर सप्ताह जैसे ही बुकिंग के लिए वेबसाइट खुलती है, कुछ ही मिनटों में सभी कमरे बुक हो जाते हैं।
डॉ. बडोला के अनुसार ढिकाला ऐसा स्थान है जहां पर्यटकों को वन्यजीवों को बेहद करीब से देखने का अवसर मिलता है,यहां बंगाल टाइगर, हाथी, हिरण, लेपर्ड, घड़ियाल, मगरमच्छ, महाशीर मछली और सैकड़ों पक्षी प्रजातियां प्राकृतिक वातावरण में देखी जा सकती हैं। इसके अलावा यहां के विशाल घास के मैदान (ग्रासलैंड) और समृद्ध जैव विविधता भी पर्यटकों को आकर्षित करती है। ढिकाला जोन में रात्रि विश्राम की बुकिंग कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की आधिकारिक वेबसाइट कॉर्बेटजीओवीडॉटओआरजी के माध्यम से की जाती है।
निदेशक ने बताया कि भारतीय पर्यटकों के लिए 45 दिन पहले बुकिंग की सुविधा दी जाती है,विदेशी पर्यटकों के लिए 90 दिन पहले बुकिंग खुलती है। उन्होंने बताया कि हर रविवार को ऑनलाइन बुकिंग पोर्टल खुलता है और उसी दिन चंद मिनटों में सभी कमरे बुक हो जाते हैं। विदेशी पर्यटकों के लिए यहां चार कमरे आरक्षित भी रखे गए हैं। कॉर्बेट प्रशासन ने पर्यटकों से अपील की है कि वे केवल विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से ही बुकिंग कराएं।
डॉ. बडोला ने बताया कि इंटरनेट पर कई फर्जी वेबसाइटें भी सक्रिय हैं जो कॉर्बेट में बुकिंग के नाम पर पर्यटकों से धोखाधड़ी कर रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, इसलिए पर्यटकों से अनुरोध है कि वे केवल अधिकृत वेबसाइट या विभागीय चैनलों के माध्यम से ही अपनी बुकिंग कराएं। ढिकाला जोन का अनुभव सिर्फ सफारी तक सीमित नहीं है, यहां जंगल के बीच बने वन विश्राम गृहों में रात्रि विश्राम करना अपने आप में एक अनोखा अनुभव माना जाता है, सुबह और शाम की सफारी के दौरान पर्यटकों को जंगल के भीतर से गुजरते हुए प्राकृतिक सौंदर्य और वन्यजीवों को बेहद करीब से देखने का मौका मिलता है। खासकर ढिकाला का विशाल घास का मैदान और रामगंगा नदी का क्षेत्र वन्यजीवों के लिए बेहद उपयुक्त माना जाता है,यहां पर्यटक बंगाल टाइगर, जंगली हाथी, चीतल और सांभर हिरण, भालू, चीता और मगरमच्छ तथा घड़ियाल एवचं कई दुर्लभ पक्षियों को देख सकते हैं।
उन्होंने कहा कि ढिकाला पर्यटन जोन में पर्यटकों के लिए रात्रि विश्राम की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। यहां कुल 41 कमरे उपलब्ध हैं। इनमें ढिकाला कैंप में 28 कमरेसुल्तान क्षेत्र में 2 कमरे गैरल में 6 कमरे खिनानौली में 3 कमरे सर्फदुली क्षेत्र में 2 कमरेउपलब्ध हैं। इसके अलावा यहां 20 डॉरमेट्री बेड की भी सुविधा है, जिससे बजट पर्यटक भी जंगल में रुकने का अनुभव ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि रूम किराया और सफारी शुल्क भारतीय पर्यटकों के लिए दो व्यक्तियों के एक कमरे का किराया लगभग 5000 से 7500 रुपये प्रति रात के बीच होता है। वहीं विदेशी पर्यटकों के लिए यही सुविधा लगभग 9000 रुपये या उससे अधिक में उपलब्ध होती है। इस शुल्क में सफारी के लिए उपयोग होने वाली जिप्सी या अन्य वाहन का किराया अलग से देना होता है. कॉर्बेट में कैंटर से डे सफारी का भी विकल्प उपलब्ध है। कैंटर सफारी के लिए प्रति व्यक्ति लगभग 1900 से 2000 रुपये तक का परमिट शुल्क लिया जाता है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में कुल आठ पर्यटन जोन हैं, जिनमें ढिकाला,बिजरानी, झिरना, ढेला, दुर्गादेवी, सोननदी, गर्जिया पाखरो शामिल हैं। इनमें से ढिकाला, बिजरानी, झिरना, ढेला और दुर्गादेवी जोन पर्यटकों के बीच सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। वहीं झिरना, ढेला और गर्जिया जोन पूरे साल खुले रहते हैं, जबकि अन्य जोन मानसून के दौरान बंद कर दिए जाते हैं। स्थानीय पर्यटन कारोबारियों का मानना है कि ढिकाला जोन कॉर्बेट पर्यटन की रीढ़ है, इसी जोन के कारण बड़ी संख्या में देशी और विदेशी पर्यटक रामनगर और कॉर्बेट क्षेत्र में आते हैं। ढिकाला में रात्रि विश्राम का सपना लगभग हर वन्यजीव प्रेमी देखता है। यही वजह है कि पर्यटक जब यहां आते हैं तो वे कॉर्बेट के अन्य पर्यटन जोनों का भी भ्रमण करते हैं, जिससे पूरे क्षेत्र के पर्यटन व्यवसाय को बढ़ावा मिलता है। पर्यटन कारोबारियों का कहना है कि ढिकाला जोन का अनुभव ऐसा है जो हर पर्यटक अपने जीवन में कम से कम एक बार लेना चाहता है। जंगल के बीच रात बिताना, सुबह की धुंध में वन्यजीवों को देखना और प्रकृति के बीच समय बिताना किसी रोमांच से कम नहीं होता। कुल मिलाकर देखा जाए तो कॉर्बेट टाइगर रिजर्व का ढिकाला जोन आज भी वन्यजीव पर्यटन के लिहाज से सबसे बड़ा आकर्षण बना हुआ है, हर साल हजारों पर्यटक यहां रात्रि विश्राम और जंगल सफारी का अनोखा अनुभव लेने पहुंचते हैं। यही कारण है कि बुकिंग खुलते ही कुछ ही मिनटों में सभी कमरे फुल हो जाते हैं और पर्यटकों को इस अद्भुत अनुभव के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।
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