रायपुर , दिसंबर 18 -- ) छत्तीसगढ़ सरकार के सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू) और स्मार्ट सिटी मिशन के क्रियान्वयन को लेकर भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट ने राज्य की प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाए हैं।
मार्च 2023 तक की अवधि पर आधारित यह रिपोर्ट मंगलवार को विधानसभा में प्रस्तुत की गई, जिसकी जानकारी आज मीडिया को दी गई। जिसमें परियोजना प्रबंधन, वित्तीय नियंत्रण और कॉरपोरेट गवर्नेंस में कई बड़ी कमियां सामने आई हैं।
कैग द्वारा राज्य के कुल 20 सार्वजनिक उपक्रमों के प्रदर्शन की समीक्षा की गई। रिपोर्ट के अनुसार इन उपक्रमों का वार्षिक टर्नओवर 42,172.73 करोड़ रुपये रहा, जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का लगभग 9.22 प्रतिशत है। इसके बावजूद अधिकांश उपक्रम अपेक्षित आर्थिक प्रदर्शन करने में असफल रहे।
रिपोर्ट के अनुसार 10 पीएसयू ने जहां कुल 879.22 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया, वहीं सात उपक्रमों को 1,143.10 करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ा। विशेष रूप से पांच प्रमुख पीएसयू पर 10,252.86 करोड़ रुपये का संचयी घाटा दर्ज किया गया है, जो उनकी दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
कॉरपोरेट गवर्नेंस के मोर्चे पर भी स्थिति संतोषजनक नहीं पाई गई। इसमें 16 पीएसयू में निदेशक मंडल की निर्धारित न्यूनतम बैठकों का आयोजन नहीं किया गया। वहीं 12 उपक्रमों में स्वतंत्र निदेशकों की संख्या अधूरी रही। कई संस्थानों में ऑडिट कमेटी और सतर्कता तंत्र का गठन तक नहीं किया गया, जो कंपनी अधिनियम 2013 के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है।
स्मार्ट सिटी मिशन के तहत रायपुर, बिलासपुर और नवा रायपुर में स्वीकृत परियोजनाओं की कुल लागत 9,627.70 करोड़ रुपये है, लेकिन मार्च 2023 तक केवल लगभग 62 प्रतिशत कार्य ही पूर्ण हो सका। वर्ष 2016-17 से 2022-23 के बीच 476 कार्यादेश जारी किए गए, जबकि वास्तविक व्यय केवल 1,213.12 करोड़ रुपये रहा, जो स्वीकृत राशि का करीब 46 प्रतिशत है।
कैग रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कार्यस्थल समय पर उपलब्ध न होना, बार-बार डिजाइन में बदलाव और प्रशासनिक देरी के कारण परियोजनाएं लगातार पिछड़ती रहीं। नवा रायपुर स्मार्ट सिटी परियोजना में 84 प्रतिशत कार्य एक ही ठेकेदार को सौंपे जाने को लेकर भी रिपोर्ट में आपत्ति दर्ज की गई है, जिसे प्रतिस्पर्धा की कमी का संकेत माना गया है।
रिपोर्ट में यह खुलासा भी हुआ कि स्मार्ट सिटी मिशन के नाम पर 128 ऐसी परियोजनाएं स्वीकृत की गईं, जो स्मार्ट सॉल्यूशन की मूल अवधारणा पर खरी नहीं उतरीं। खेल मैदान, उद्यान और सौंदर्यीकरण जैसे कार्यों पर खर्च किया गया, जबकि जल संरक्षण, ऊर्जा दक्ष भवन और डिजिटल समाधान जैसे अनिवार्य घटक कई परियोजनाओं में शामिल नहीं थे।
अनुपालन लेखापरीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि छत्तीसगढ़ स्टेट हाउसिंग बोर्ड द्वारा 55 करोड़ रुपये सामान्य खाते में रखे गए, जिससे ऑटो-स्वीप सुविधा का लाभ नहीं लिया गया और राज्य को लगभग 5.32 करोड़ रुपये की संभावित ब्याज आय का नुकसान हुआ।
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