लखनऊ , फरवरी 03 -- किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. वेद प्रकाश ने कहा कि तंबाकू, धूम्रपान और शराब का सेवन कैंसर के सबसे बड़े रोके जा सकने वाले कारण हैं और इन्हें छोड़ना जीवन बचाने की दिशा में सबसे अहम कदम है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कैंसर से होने वाली बीमारी और मृत्यु दर घटाने के लिए शीघ्र निदान और समय पर उपचार अत्यंत आवश्यक है।
विश्व कैंसर दिवस से एक दिन पूर्व मंगलवार को आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. वेद प्रकाश ने कहा कि डब्ल्यूएचओ की शाखा इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च आन कैंसर (आईएआरसी) के अनुसार दुनिया भर में हर साल लगभग दो करोड़ नए कैंसर मामले सामने आते हैं। 2050 तक यह संख्या 3.5 करोड़ तक पहुंच सकती है। कैंसर विश्व में मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण है और हर वर्ष करीब 1 करोड़ मौतें इससे होती हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में प्रतिवर्ष लगभग 14-15 लाख नए मरीज सामने आते हैं और 8.5-9 लाख लोगों की मृत्यु कैंसर से होती है। देश में 60 प्रतिशत से अधिक मरीज तीसरे या चौथे स्टेज में पहचान में आते हैं, जिससे इलाज के परिणाम प्रभावित होते हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि 40 प्रतिशत से अधिक कैंसर जनित मौतें ऐसे जोखिम कारकों से जुड़ी हैं जिन्हें बदला जा सकता है जैसे तंबाकू, शराब, असंतुलित आहार और शारीरिक निष्क्रियता।
डॉ. वेद प्रकाश ने बताया कि विश्व स्तर पर फेफड़ों का कैंसर सबसे अधिक पाया जाने वाला और कैंसर से होने वाली मौतों का प्रमुख कारण है जबकि महिलाओं में स्तन कैंसर सबसे आम है। तंबाकू सेवन से हर साल लाखों मौतें होती हैं और शराब कम से कम सात प्रकार के कैंसर से जुड़ी है। कैंसर जोखिम के लिए शराब की कोई सुरक्षित मात्रा नहीं मानी जाती।
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