तिरुवनंतपुरम , अप्रैल 07 -- केरल में तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन के बीच तीखी राजनीतिक तकरार ने राज्य विधानसभा चुनावों से पहले चुनावी माहौल को और गरमा दिया है। दोनों नेता शासन और विकास के मुद्दों पर एक-दूसरे पर तीखे हमले कर रहे हैं।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब श्री रेवंत रेड्डी ने केरल में चुनाव प्रचार के दौरान वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सरकार पर भ्रष्टाचार, खराब शासन और विकास की कमी का आरोप लगाया। उन्होंने तेलंगाना के प्रशासन से तुलना करते हुए राज्य में एक राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया।

केरल के मुख्यमंत्री ने तुरंत जवाब देते हुए इन आलोचनाओं को खारिज कर दिया और कहा कि केरल को तेलंगाना से सीखने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने श्री रेड्डी पर आरोप लगाया कि वे चुनाव के इस मौसम में मतदाताओं को गुमराह करने के मकसद से बिना जानकारी के और राजनीति से प्रेरित बयान दे रहे हैं।

यह विवाद तब और बढ़ गया जब श्री रेड्डी ने अपने आरोपों को दोहराया और केरल के मुख्यमंत्री के दावों को चुनौती दी। उन्होंने शासन के रिकॉर्ड पर सीधे सार्वजनिक बहस करने की भी मांग की। उन्होंने मलयालम फिल्म 'नरसिम्हम' का जिक्र करते हुए अपने जवाब के आखिर में एक ताना मारा, 'नी पो मोने विजया,' (जा बेटा, अपना काम कर) जो मलयालम फिल्मों के दिग्गज अभिनेता मोहनलाल के एक मशहूर डायलॉग की याद दिलाता है।

श्री विजयन ने इसका करारा जवाब देते हुए कन्नूर में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वे अभी तुरंत जवाब नहीं देंगे बल्कि चुनाव खत्म होने के बाद जवाब देंगे। उन्होंने कहा, 'डैश मोने रेवंत (सुनो रेवंत), तुम्हारा जवाब आ रहा है।' उन्होंने कहा कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने पड़ोसी राज्यों के नेताओं के बीच अपेक्षित गरिमा और मर्यादा का पालन नहीं किया है।

चूंकि दोनों मुख्यमंत्री पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। इसलिए इस जुबानी जंग ने केरल के चुनावी अभियान को एक नया आयाम दे दिया है। इसने राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा है और राज्य में राजनीतिक मतभेदों को और भी गहरा कर दिया है।

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