तिरुवनंतपुरम , मार्च 07 -- केरल पुलिस ने साइबर वित्तीय अपराधों के खिलाफ राज्यव्यापी विशेष अभियान "ऑपरेशन साइ-हंट 2.0" के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए 165 लोगों को गिरफ्तार किया और 455 मामले दर्ज किए हैं।

केरल पुलिस द्वारा चलाए गए इस अभियान के दौरान राज्यभर में 1,168 छापे मारे गए, 216 लोगों को नोटिस जारी किए गए और साइबर ठगी में इस्तेमाल होने की आशंका वाले 306 इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए।

पुलिस सूत्रों के अनुसार इस अभियान का उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म और बैंकिंग प्रणाली का दुरुपयोग कर देशभर में फैल रहे साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क की पहचान कर उन्हें तोड़ना था। यह कार्रवाई राज्य के पुलिस प्रमुख के निर्देश पर 5 मार्च 2026 की सुबह 7 बजे से सभी थानों के अधिकार क्षेत्र में एक साथ शुरू की गई।

अभियान का संचालन साइबर ऑपरेशंस विंग की केंद्रीय निगरानी में किया गया, जबकि विभिन्न रेंज के डीआईजी और जिला पुलिस प्रमुखों ने समन्वय की जिम्मेदारी संभाली। जांच में खुफिया जानकारी आधारित रणनीति अपनाई गई, जिसमें साइबर अपराध के वित्तीय नेटवर्क को निशाना बनाया गया। पुलिस ने ऐसे म्यूल बैंक खातों, धोखाधड़ी से प्राप्त पैसे निकालने वाले व्यक्तियों और साइबर ठगी में शामिल वित्तीय मध्यस्थों पर कार्रवाई की। म्यूल बैंक खाते वैसे खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी धोखाधड़ी की राशि जमा करने के लिए करते हैं।

जांच के दौरान 422 म्यूल बैंक खाते साइबर धोखाधड़ी से जुड़े पाए गए। इसके अलावा 670 लोग चेक के जरिए पैसे निकालने में शामिल पाए गए, जबकि 263 लोगों का संबंध एटीएम के माध्यम से साइबर ठगी की रकम निकालने से सामने आया।

कार्रवाई के लिए जानकारी मुख्य रूप से नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर मिली शिकायतों और वित्तीय खुफिया इनपुट के आधार पर जुटाई गई। जिन मामलों में अंतरराज्यीय कनेक्शन पाए जाएंगे, उनमें अन्य राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस ने लोगों से साइबर धोखाधड़ी से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि ओटीपी, पीआईएन, सीवीवी, पासवर्ड जैसी बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें, संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें और अंजान वर्क-फ्रॉम-होम या ऑनलाइन टास्क ऑफर से सावधान रहें।

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