तिरुवनंतपुरम , दिसंबर 28 -- केरल के तिरुवनंतपुरम निगम भवन में कार्यालय स्थान को लेकर वट्टियूरकावु के विधायक एवं मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी नेता वी.के. प्रशांत और भारतीय जनता पार्टी की पार्षद एवं पूर्व पुलिस महानिदेशक आर. श्रीलेखा के बीच विवाद सामने आया है।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब श्रीलेखा (सेवानिवृत्त आईपीएस) ने कथित रूप से विधायक से नगर निगम भवन में स्थित उस कार्यालय कक्ष को खाली करने का अनुरोध किया, जिस पर फिलहाल उनका कब्जा है। उन्होंने कहा कि पार्षद के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए उन्हें उस स्थान की आवश्यकता है। विधायक प्रशांत के अनुसार, उन्होंने यह अनुरोध फोन पर किया था।
इस घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए श्री प्रशांत ने कहा कि वह केवल टेलीफोन पर किए गए अनुरोध के आधार पर कार्यालय खाली नहीं कर सकते।
श्री प्रशांत ने कहा कि उनका कार्यालय पिछले सात वर्षों से इसी परिसर से चल रहा है और उनके पास एक वैध किराया समझौता है, जो मार्च 2026 तक लागू है। उन्होंने आगे कहा कि इस स्थान को वापस लेने के किसी भी प्रयास के लिए स्थापित प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन करना होगा। विधायक ने स्पष्ट किया कि चूंकि यह इमारत नगर निगम के स्वामित्व में है इसलिए किसी भी पार्षद को खुद से कमरे की मांग करने का कोई अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा आवंटन को रद्द करने के लिए नगर परिषद को औपचारिक निर्णय लेना होगा, जिसके बाद नगर सचिव को आधिकारिक बेदखली का नोटिस जारी करना होगा। उन्होंने कहा कि जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती तब तक कार्यालय खाली करना अनुचित होगा।
श्री प्रशांत ने याद दिलाया कि इस भवन का निर्माण तिरुवनंतपुरम के महापौर के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान हुआ था और उन्होंने ही इसका उद्घाटन किया था। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि प्रशासनिक मुद्दों को अनौपचारिक संचार के बजाय उचित एवं गरिमापूर्ण तरीके से निपटाना चाहिए।
सार्वजनिक विवाद के बीच, पार्षद श्रीलेखा रविवार सुबह विधायक के कार्यालय गईं और उनसे बातचीत की। इसके बाद, दोनों ने स्पष्ट किया कि उनके बीच कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं है और उन्हें कार्यालय परिसर से एक साथ निकलते देखा गया, जो इस मुद्दे को सुलझाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम प्रतीत होता है।
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए सुश्री श्रीलेखा ने कहा कि उनका अनुरोध स्थान की कमी के कारण है। उन्होंने कहा कि पार्षद के रूप में उन्हें जो कार्यालय आवंटित किया गया है वह प्रभावी कामकाज के लिए अपर्याप्त है जबकि विधायक का कार्यालय तुलनात्मक रूप से ज्यादा विशाल एवं बेहतर सुविधाओं से सुसज्जित है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि निगम भवन का स्वामी है और उसे कार्यालय स्थान का आवंटन एवं उपयोग के संबंध में निर्णय लेने का अधिकार है।
सुश्री श्रीलेखा ने आगे कहा कि पुलिस बल में सेवा काल के दौरान और प्रशांत के मेयर रहने के दौरान लंबे समय से उनके श्री प्रशांत के साथ व्यक्तिगत संबंध हैं। उन्होंने कहा कि अनुरोध से दो दिन पहले उन्होंने उनसे संपर्क करने की कोशिश की थी और सौहार्दपूर्ण तरीके से बात की थी, उन्होंने अपने व्यवहार को बड़ी बहन जैसा बताया।
अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए पार्षद ने कहा कि उन्होंने कोई आधिकारिक आदेश या निर्देश जारी नहीं किया है बल्कि केवल व्यक्तिगत अपील की है। उन्होंने कहा कि जहां एक विधायक अपने निर्वाचन क्षेत्र में कहीं भी कार्यालय स्थापित कर सकता है, वहीं वार्ड पार्षद के विकल्प सीमित होते हैं और कार्यालय सुविधाओं के लिए वह बहुत हद तक नगर निगम पर निर्भर रहता है।
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