अलाप्पुझा , जनवरी 25 -- केरल की जानी-मानी पर्यावरणविद् देवकी अम्मा को पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता की सुरक्षा में उनके आजीवन योगदान को देखते हुए प्रतिष्ठित पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुना गया है।

अब 90 साल से अधिक उम्र की देवकी अम्मा ने अलाप्पुझा जिले में अपने पैतृक घर की पांच एकड़ बंजर जमीन को 'तपोवनम' नाम के हरे-भरे, आत्मनिर्भर जंगल में बदलकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान हासिल की। अम्मा ने रेतीली और बंजर जमीन को सींचकर पेड़ों, औषधीय पौधों, पक्षियों, कीड़ों और जलीय जीवों से भरे एक हरे-भरे इकोसिस्टम में बदल दिया।

उन्होंने पर्यावरण काे संरक्षित करने की यात्रा 40 साल से भी पहले शुरू की थी, जो पूरी तरह से प्रतिबद्धता और लगन से प्रेरित थी। देवकी अम्मा ने एक बड़ी दुर्घटना के बाद गंभीर शारीरिक चुनौतियों का सामना करने के बावजूद एक-एक करके पौधे लगाना जारी रखा और उन्हें असाधारण समर्पण और धैर्य के साथ पाला-पोसा।

आज तपोवनम न केवल पारिस्थितिक बहाली का एक जीता-जागता उदाहरण है बल्कि छात्रों, शोधकर्ताओं और प्रकृति प्रेमियों के लिए सीखने की जगह भी है। स्थानीय निवासियों को जंगल में उगाए गए औषधीय पौधों तक मुफ्त पहुंच से फायदा हुआ है, जो उनके प्रयासों के सामाजिक मूल्य को और भी रेखांकित करता है।

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