तिरुवनंतपुरम , अप्रैल 07 -- केरल में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण, जनसांख्यिकीय बदलाव और स्थानीय मुद्दों जैसे कारकों के बीच विधानसभा चुनाव के लिए मैदान में आये 863 उम्मीदवारों का भविष्य नौ अप्रैल को इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन में बंद हो जायेगा।

केरल में 140 विधानसभा सीटें हैं।

मैदान में 863 उम्मीदवारों के साथ 2026 के चुनाव हाल के दिनों में सबसे कड़े मुक़ाबले वाले चुनावों में से एक बन रहे हैं। राजनीतिक माहौल अभी अनिश्चित है, किसी भी मोर्चे को साफ़ बढ़त नहीं मिल रही है, क्योंकि सांप्रदायिक तनाव, जनसांख्यिकीय बदलाव और चुनाव क्षेत्र से जुड़ी चिंताएं मतदाताओं की भावना को बदलरही हैं।

इस विशाल चुनावी कार्यक्रम के लिए राज्य में 30,471 मतदान केंद्र स्थापित किये गये हैं। सभी जगहों पर सुरक्षा बढ़ा दी गयी है।

कुल 76,203 कर्मियों को तैनात किया गया है, जिसमें 28,209 विशेष पुलिस अधिकारी शामिल हैं। लगभग 2,500 मतदान केंद्रों को संवेदनशील चिह्नित किया गया है।

राज्य पुलिस के साथ 140 कंपनियां केंद्रीय सशस्त्र बलों की और 20 कंपनियां तमिलनाडु पुलिस की तैनात की गयी हैं, ताकि चुनावी प्रक्रिया सुचारू और पारदर्शी रहे। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि सभी लॉजिस्टिकल तैयारियां और निवारक उपाय पूरे कर लिये गये हैं।

प्रचार अवधि दो सप्ताह से भी कम रही। इसमें आक्रामक संपर्क, बड़ी रैलियां, घर-घर जाकर प्रचार शामिल रहा।

एलडीएफ और यूडीएफ दोनों ने भ्रष्टाचार, वित्तीय कुप्रबंधन और भाजपा के साथ कथित संबंधों को लेकर तीखे आरोप-प्रत्यारोप लगाये हैं।

एलडीएफ ने कांग्रेस पर वायनाड में भूस्खलन पीड़ितों के लिए जमा किये गये फंड के दुरुपयोग का आरोप लगाया। वहीं यूडीएफ ने सत्तारूढ़ मोर्चे की शासन संबंधी चूक का उल्लेख किया।

राष्ट्रीय राजनीतिक दिग्गज भी इस चुनावी अभियान में शामिल रहे। भाजपा के नेताओं में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और एस जयशंकर शामिल हैं। उन्होंने पूरे राज्य में व्यापक प्रचार किया।

कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और सचिन पायलट ने प्रचार किया।

इस बीच मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और वरिष्ठ नेता एमएमए बेबी के नेतृत्व वाले एलडीएफ ने अपने शासन रिकॉर्ड, कल्याण कार्यक्रमों और अनुशासित संगठनात्मक ताकत को प्रमुखता दी।

2.7 करोड़ से अधिक मतदाताओं के मतदान करने की उम्मीद है। विधानसभा चुनावों को केरल की राजनीतिक मूड का बैरोमीटर मानकर बारीकी से देखा जा रहा है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि पहचान की राजनीति, सत्ता विरोधी भावना, स्थानीय मुद्दे और विद्रोही उम्मीदवार अंतिम फैसले को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

मतों की गिनती चार मई को की जायेगी।

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