कोच्चि , जनवरी 21 -- केरल उच्च न्यायालय ने बुधवार को सबरीमाला स्वर्ण चोरी मामले में त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) के पूर्व अध्यक्ष ए. पद्मकुमार और दो अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।
न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन ने याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि आरोपों की गंभीरता और अदालत के समक्ष रखे गए साक्ष्यों की प्रकृति को देखते हुए आरोपी जांच के इस चरण में जिम्मेदारी से बच नहीं सकते हैं। ये आरोप मंदिर की संपत्तियों के प्रबंधन में विश्वास के गंभीर उल्लंघन से संबंधित हैं।
अदालत ने श्री पद्मकुमार के अलावा टीडीबी के पूर्व प्रशासनिक अधिकारी बी. मुरारी बाबू और कर्नाटक स्थित जौहरी रोद्दम पांडुरंगैया नागा गोवर्धन को भी जमानत देने से इनकार कर दिया।
तीनों आरोपियों पर सबरीमाला अयप्पा मंदिर के गर्भगृह के भीतर जीर्णोद्धार कार्यों के दौरान 'द्वारपाल' की मूर्तियों और अन्य स्वर्ण-लेपित संरचनाओं से हटाए गए सोने के गबन की साजिश रचने का आरोप है। अभियोजन पक्ष ने अदालत को सूचित किया कि मंदिर के कार्यों के लिए भारी मात्रा में सौंपे गये सोने को कथित तौर पर दूसरी जगह भेज दिया गया, जिससे मंदिर को काफी नुकसान हुआ।
आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिसमें आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार से संबंधित अपराध शामिल हैं।
जांचकर्ताओं ने तर्क दिया कि इस स्तर पर जमानत देने से जांच पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि मामले में वित्तीय लेनदेन का पता लगाना, संपत्तियों की बरामदगी और कई गवाहों की जांच शामिल है। अदालत ने अभियोजन पक्ष के तर्क से सहमति जताई और उल्लेख किया कि जांच अभी भी महत्वपूर्ण चरण में है।
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