रांची , फरवरी 01 -- झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने आज केन्द्रीय बजट 2026-27 को व्यथित और निराश करने वाला बजट बताया।
श्री किशोर ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में यह कहा कि बजट सरकार के तीन कर्तव्यों को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है। विकास की गति को तेज़ करना, क्षमताओं का निर्माण करना तथा यह सुनिश्चित करना कि विकास समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचे। इस वक्तव्य से यह आशा जगी थी कि बजट में कुछ ठोस और सार्थक प्रावधान देखने को मिलेंगे। किंतु बजट भाषण के शेष अंशों ने व्यापक रूप से निराश किया।
उन्होंने कहा कि इन तीन कर्तव्यों की प्राप्ति के लिए क्या रोडमैप अपनाया जाएगा, इसका स्पष्ट और ठोस संकेत इस बजट में कहीं दिखाई नहीं देता। कृषि, उद्योग, एमएसएमई, शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना, पर्यटन एवं पर्यावरण जैसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए जो प्रावधान किए गए हैं, वे न केवल अपर्याप्त प्रतीत होते हैं बल्कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से भी कोसों दूर हैं।
श्री किशोर ने कहा कि देश में निवेश-सकल घरेलू उत्पाद अनुपात पिछले कई वर्षों से लगातार कम बना हुआ है। इस अनुपात को बढ़ाए बिना देश की वांछित विकास दर प्राप्त करना संभव नहीं है। किंतु इस अनुपात को बढ़ाने के लिए क्या रणनीति अपनाई जाएगी, इस विषय में बजट पूर्णतः मौन है। उन्होंने कहा कि बजट में विदेशी मुद्रा विनिमय दर को स्थिर करने अथवा बहुमूल्य धातुओं-विशेषकर सोना और चाँदी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए किसी भी प्रकार के प्रयास का उल्लेख नहीं किया गया है। पिछले कुछ वर्षों से भारतीय मुद्रा लगातार कमजोर होती जा रही है। वर्ष 2014 से पूर्व जहाँ एक अमेरिकी डॉलर की कीमत लगभग 47 रुपये थी, वहीं अब यह 90 रुपये से अधिक हो चुकी है। इसी प्रकार, हाल के महीनों में सोने और चाँदी की कीमतों में न केवल अत्यधिक वृद्धि हुई है, बल्कि उनमें तीव्र उतार चढ़ाव भी देखने को मिला है। इसके बावजूद, बजट में इन गंभीर परिस्थितियों के समाधान के लिए किसी प्रकार की पहल तो दूर उनका उल्लेख तक नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि झारखण्ड राज्य के लिए यह केंद्रीय बजट निराशाजनक रहा है। 2026-27 के केन्द्रीय बजट में झारखण्ड की घोर उपेक्षा की गई। केन्द्रीय वित्त मंत्री के बजट भाषण में झारखण्ड राज्य के अंतर्गत न तो नए रेल लाइन, नई यात्री ट्रेन की घोषणा की गई और न ही कृषि, सिंचाई और सामाजिक प्रक्षेत्रों को ही कोई स्थान दिया गया है।
10 जनवरी 2026 को भारत सरकार के बजट पूर्व विमर्श पर मैंने झारखण्ड का प्रतिनिधित्व करते हुए केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को स्मारित किया था कि, मनरेगा योजना अंतर्गत केंद्र और राज्य के बीच 60% और 40% खर्च के बंटवारे से झारखण्ड सरकार को प्रतिवर्ष अतिरिक्त बोझ पड़ने वाले लगभग 5000 करोड़ रुपये केंद्र झारखण्ड राज्य को दे।केंद्र सरकार झारखण्ड में 1 लाख हेक्टेयर खेतों के सिंचाई क्षमता की वृद्धि के लिए अगले 4 वर्षों तक प्रत्येक वर्ष झारखण्ड को 2000 करोड़ रुपये उपलब्ध कराये। माल एवं सेवा कर के कर युक्तिकरण से प्रत्येक वर्ष झारखण्ड को होने वाले 4000 करोड़ रुपये क्षति की भरपाई करे केंद्र सरकार। विभिन्न कोल कंपनियों के पास झारखण्ड का 1 लाख 36 हजार करोड़ रुपये बकाया राशि का भुगतान केंद्र सरकार झारखण्ड को आगामी वित्तीय वर्ष में उपलब्ध कराये।
श्री किशोर ने कहा कि बिहार के तर्ज पर 10 हजार रुपये झारखण्ड की मइयांओं को भी उद्यमिता के लिए केंद्र सरकार उपलब्ध कराये। असीम संभावनाओं के बाद भी झारखण्ड में पर्यटन के विकास के लिए बजट में कोई स्थान नहीं। झारखण्ड के उपरोक्त सभी मांगों को केंद्र सरकार ने सिरे से दरकिनार कर दिया है।
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