पटना , फरवरी 01 -- ारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव रामनरेश पाण्डेय ने रविवार को आरोप लगाया कि केन्द्रीय बजट में बिहार की उपेक्षा की गई है। श्री पाण्डेय ने आज बयान जारी कर कहा कि बजट में किसान, मजदूर, महिलाओं, युवाओं और बेरोजगारों का ध्यान नहीं रखा गया है। उन्होंने कहा कि जिन योजनाओं की घोषणा की गई है, वह पुरानी है। महंगाई और बेरोजगारी कम करने की कोई ठोस घोषणा नहीं की गई। बजट पूरी तरह पूंजीपतियों के हित में तैयार किया गया है। यह बजट जन विरोधी और पूंजीपतियों का हितैषी है।
भाकपा के राज्य सचिव ने कहा कि वित्तीय वर्ष-2026-27 का केन्द्रीय बजट वैश्विक नीतिगत अनिश्चितताओं के पीछे भारतीय जनता पार्टी ( भाजपा) शासन के पिछले 11वर्षों की विफलताओं को छिपाने का एक प्रयास है। उन्होंने कहा कि भाजपा के कॉरपोरेट-समर्थक नीति-निर्धारण और कष्टकारी निर्णयों के कारण आम लोगों को व्यापक दुखों का सामना करना पड़ा है और सरकार ऐसे समय में बेशर्मी से अपनी विफलताओं को बाहरी विकास दिखा कर छिपाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें पहले की तुलना में अनुकूल बनी हुई हैं, फिर भी सरकार का यह रवैया समझ से परे है।
श्री पाण्डेय ने कहा कि भाजपा ने रोजगार सृजन पर बयानबाजी तो बहुत की है, लेकिन कार्यान्वयन में बड़े पैमाने पर विफल रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक दशक पहले प्रति वर्ष दो करोड़ नौकरियाँ देने का वादा किया था। यानी अब तक कुल मिलाकर 20 करोड़ नौकरियां होनी चाहिए थीं। बेरोजगारी से युवा बेचैन है लेकिन भाजपा के लिए सिर्फ बयानबाजी ही मायने रखती है। शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए आवंटन स्थिर बना हुआ है। सरकारी प्राप्तियों में अप्रत्यक्ष करों का हिस्सा कॉरपोरेट टैक्स से अधिक है, जिससे पता चलता है कि सरकार आम लोगों पर बोझ डाल रही है। बजट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार युवाओं, महिलाओं, गरीबों और किसानों पर केवल शोर मचाती है, जबकि विशेष रूप से कॉरपोरेट हित को आगे बढ़ाती है।
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