गुलमर्ग (जम्मू और कश्मीर) , फरवरी 22 -- गुलमर्ग की दूधिया सफेद ढलानों पर सोमवार से शुरु हो रहे खेलो इंडिया शीतकालीन खेल (केआईडब्ल्यूजी) 2026 के छठे संस्करण के दूसरे चरण में सेना अपने टीम चैंपियनशिप खिताब का बचाव करने उतरेगी।
कल से शुरु हो रहे इन खेलों में सेना की कहानी अब केवल भागीदारी तक सीमित नहीं रह गई है, अब यह उनके वर्चस्व की कहानी है। भारत सरकार की प्रमुख 'खेलो इंडिया' पहल के तहत 2020 में शुरू किए गए इन शीतकालीन खेलों का उद्देश्य उस देश में बर्फ के खेलों को मुख्यधारा में लाना था, जो क्रॉस-कंट्री स्कीइंग के बजाय क्रिकेट को बेहतर समझता है। महज छह सालों में इन खेलों ने हिमालय की वादियों में अपनी एक नई पहचान बना ली है।
2020, 2021 और 2023 के पहले तीन संस्करणों की मेजबानी जम्मू-कश्मीर ने की और जीत भी हासिल की। 2024 के खेलो इंडिया विंटर गेम्स में एक बड़ा बदलाव देखा गया जब सेना ने 10 स्वर्ण, 5 रजत और 6 कांस्य जीतकर तालिका में अपना अधिकार जमा लिया। 2025 के पांचवें संस्करण तक, सेना एक दावेदार से मानक (बेंचमार्क) बन गई थी। उन्होंने सात स्वर्ण सहित कुल 18 पदक जीतकर तालिका में शीर्ष स्थान प्राप्त किया।
खेलो इंडिया विंटर गेम्स के छठे संस्करण की शुरुआत 20 जनवरी को लेह, लद्दाख में हुई। पहले चरण में आइस हॉकी और आइस स्केटिंग शामिल थे, जिसमें पहली बार फिगर स्केटिंग को भी जोड़ा गया। नवांग दोरजे स्टोबदान स्टेडियम में, सेना ने एक रोमांचक फाइनल में चंडीगढ़ को 3-2 से हराकर पुरुषों का आइस हॉकी खिताब बरकरार रखा।
अब दूसरा चरण गुलमर्ग के कांगदोरी फेज-1 और गोल्फ कोर्स क्लब में शुरू हो रहा है, जहां अल्पाइन स्कीइंग, नॉर्डिक स्कीइंग, स्की माउंटेनियरिंग और स्नोबोर्डिंग जैसी स्पर्धाएं होंगी।
शुक्रवार को, गुलमर्ग खेल जगत में सेना की बढ़ती सक्रियता के एक और गवाह बना। भारतीय सेना की एक प्रमुख पहल, 'चिनार ओपन विंटर गेम्स 2026', चिनार कॉर्प्स के डैगर डिवीजन के तत्वावधान में बर्फ से ढकी वादियों के बीच संपन्न हुई। स्कीइंग, स्नोबोर्डिंग और स्केटिंग सहित आठ स्पर्धाओं में 166 महिलाओं और 494 पुरुषों सहित रिकॉर्ड 660 प्रतिभागियों के साथ, इस आयोजन ने कश्मीर में शीतकालीन खेलों के प्रति सेना के बढ़ते जमीनी आधार को रेखांकित किया।
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