नैनीताल , फरवरी 03 -- पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री और नैनीताल के सांसद अजय भट्ट ने केंद्र सरकार से ऊधमसिंह नगर जिले के किच्छा में बन रहे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के सेटेलाइट सेंटर को पूर्ण एम्स का दर्जा दिए जाने की मांग की है।
मंगलवार को जारी एक बयान में श्री भट्ट ने कहा कि लोकसभा सत्र के दौरान उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से जगत प्रकाश नड्डा से भेंट कर किच्छा में बन रहे एम्स सेटेलाइट सेंटर को पूर्ण रूप से एम्स का दर्जा दिये जाने की मांग की है।
स्वास्थ्य मंत्री को दिए गए पत्र में उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण ही उसे विशेष राज्य का दर्जा दिया गया है। राज्य के पर्वतीय व मैदानी क्षेत्रों में रहने वाली बड़ी जनसंख्या को उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाओं की नितांत आवश्यकता है।
पिथौरागढ़, चम्पावत, बागेश्वर एवं अल्मोड़ा जिलों के सुदूरवर्ती पर्वतीय क्षेत्रों से किच्छा पहुंचने में लगभग 12 से 15 तथा चीन सीमा से लगे क्षेत्रों के लोगों को लगभग 16 से अधिक घण्टे किच्छा सैटेलाईट सेंटर पहुंचने में लगते हैं। यदि मरीज का यहां पर ठीक उपचार नहीं हुआ तो पुनः बरेली, मुरादाबाद, देहरादून एवं दिल्ली ले जाना पड़ता है। ऐसे में दिल्ली पहुंचने पर कुल मिलाकर लगभग 21 से 22 घण्टे लग जाते हैं।
इतनी लम्बी दूरी और पहाड़ी मार्गों से आने में कई लोगों की रास्ते में ही मृत्यु हो जाती है। आदि कैलाश, गुंजी, कुट्टी, नाभिढांग, गर्ब्यांग, जोलिंगकोंग, छियालेख, पांगला से आने में भी यह दूरी और बढ़ जाती है। इसलिए किच्छा में बन रहे एम्स सेटेलाइट सेंटर को पूर्ण एम्स का दर्जा दिया जाना जनहित में अति आवश्यक है।
आगे कहा है कि सेटेलाइट सेंटर केवल उत्तराखंड ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों जैसे पीलीभीत, बरेली, शाहजहांपुर, रामपुर आदि क्षेत्रों की बड़ी आबादी के लिए भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।
यदि किच्छा स्थित एम्स सेटेलाइट सेंटर को पूर्ण रूप से विकसित किया जाता है तो उत्तराखंड के उपरोक्त जिलों क्षेत्रों की जनता के साथ ही उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों के लाखों नागरिकों को अपने ही क्षेत्र में उन्नत स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त हो सकेंगी और उन्हें दूर-दराज के महानगरों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
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