बेंगलुरु , जनवरी 13 -- कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को "खत्म करने" का आरोप लगाया।
श्री शिवकुमार ने पैलेस ग्राउंड्स में आयोजित "मनरेगा बचाओ संघर्ष" की तैयारी बैठक को संबोधित करते हुए चेतावनी दी कि मनरेगा को कमजोर करने से कर्नाटक के लाखों ग्रामीण परिवारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मनरेगा गरीबों के लिए जीवनरेखा रहा है। इस योजना ने न केवल गारंटीकृत रोजगार और न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित की, बल्कि पंचायती राज संस्थाओं को स्थानीय विकास कार्यों को लागू करने में भी सशक्त बनाया।
उन्होंने याद दिलाया कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के दौरान श्रीमती सोनिया गांधी ने गारंटीकृत रोजगार को संवैधानिक संरक्षण दिलाया था। उन्होंने कहा, "केवल कर्नाटक में ही मनरेगा के तहत हर साल करीब 6,000 करोड़ रुपये के कार्य हुए। स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि परियोजनाओं का चयन करते थे और जॉब कार्ड धारकों को काम या मजदूरी दी जाती थी। पारदर्शिता के लिए फिंगरप्रिंट आधारित प्रणाली लागू की गई थी।"उन्होंने कहा कि किसानों को अपनी ही जमीन पर भूमि समतलीकरण, कम्पोस्ट व वर्मी कम्पोस्ट गड्ढों का निर्माण, कृषि तालाब, और बागवानी जैसे कार्यों की अनुमति थी। उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां 200 करोड़ रुपये से अधिक के कार्य किए गए, जिनमें 56,000 कम्पोस्ट गड्ढे, अर्कावती नदी पर 10 चेक डैम, छात्रावास, खेल मैदान, स्कूल, पंचायत भवन, पार्क, सड़कें और नालियां शामिल हैं।
श्री शिवकुमार ने केंद्र द्वारा लाए गए नए कानून की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इससे पंचायतों से स्थानीय कार्य तय करने का अधिकार छीन लिया गया, वित्तीय हिस्सेदारी को 90: 10 प्र्तिशत से बदलकर 60: 40 प्रतिशत कर दिया गया और इससे राज्य सरकारों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सूखा और कोविड-19 महामारी के दौरान जिन अतिरिक्त रोजगार दिनों का वादा किया गया था, वे उपलब्ध नहीं कराए गए। उन्होंने कहा, "यहां तक कि इस योजना से महात्मा गांधी का नाम भी हटा दिया गया है।"श्री शिवकुमार ने कहा, "भाजपा सरकार ने न केवल ग्रामीण रोजगार पर हमला किया है, बल्कि गांधी जी की विरासत का भी अपमान किया है। यदि सही ढंग से लागू किया जाए तो मनरेगा से बड़ा कोई कार्यक्रम नहीं है।"उन्होंने घोषणा की कि 26 जनवरी से 7 फरवरी तक राज्य की सभी विधानसभा क्षेत्रों में पदयात्राएं निकाली जाएंगी। उन्होंने ग्राम पंचायत सदस्यों, विधायकों, मंत्रियों और पार्टी नेताओं से इसमें सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा कि वे स्वयं शिकारीपुरा सहित चार-पांच स्थानों पर पदयात्राओं में हिस्सा लेंगे। साथ ही चेतावनी दी कि जो पार्टी कार्यकर्ता इस संघर्ष में रुचि नहीं दिखाएंगे, उन्हें संगठन से हटाया जाएगा।
श्री शिवकुमार ने आगामी स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारियों पर भी जोर दिया, जो उच्चतम न्यायालय और मंत्रिमंडल के आदेशों के बाद अगले चार से पांच महीनों में होने हैं। उन्होंने भूमि विकास और टैंक भराई जैसे सरकारी विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए आश्वासन दिया कि लंबित भुगतानों का जल्द निपटारा किया जाएगा। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का भी उल्लेख करते हुए कहा कि यह राज्य के भविष्य का निर्धारण करेगा और पार्टी कार्यकर्ताओं से 'वोट चोरी' के खिलाफ सतर्क रहने का आह्वान किया।
श्री शिवकुमार ने निर्वाचन धांधली के खिलाफ 1.41 करोड़ हस्ताक्षर एकत्र करने वाले जिला अध्यक्षों, विधायकों और पदाधिकारियों को बधाई दी और कहा कि उनके प्रयासों की श्रीमती सोनिया गांधी, श्री राहुल गांधी और श्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने सराहना की है।
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