नयी दिल्ली , फरवरी 23 -- केंद्र सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के लिए सोमवार को 'प्रहार' नाम से नयी नीति और रणनीति जारी की।

गृह मंत्रालय द्वारा जारी इस नीति के सात उद्देश्य बताये गये हैं,- देश के नागरिकों और उनके हितों की रक्षा के लिए आतंकवादी हमलों को रोकना, आतंकवादी खतरों के खिलाफ समुचित और त्वरित प्रतिक्रिया, पूरी सरकार के साथ काम करने के लिए आंतरिक क्षमता का विस्तार, खतरों को कम करने के लिए मानवाधिकार और कानून आधारित प्रक्रियाओं को अपनाना, कट्टरवाद सहित आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली सभी परिस्थितियों का शमन, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों का संरेखन और एकजुटता के माध्यम से समाज को आतंकवाद से उबरना और मजबूत बनाना।

इसमें आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की बात दुहरायी गयी है।

नयी नीति में खुफिया जानकारी एकत्र करने और जांच के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है। साथ ही उभरती हुई चुनौतियों से निपटने के लिए समय-समय पर आतंकवाद से निपटने के लिए कानूनों में बदलाव की भी बात कही गयी है। इसमें कहा गया है कि जांच के हर चरण में कानूनी विशेषज्ञों को शामिल करने की जरूरत है।

मंत्रालय का कहना है कि भारत अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ एक वृहद ढांचा तैयार करने की दिशा में अपने प्रयास जारी रखेगा। इसका लक्ष्य हर तरह की आतंकवादी गतिविधि को अपराध घोषित करना और उसके लिए धन की उपलब्धता रोकना है।

जारी नीति में कहा गया है कि भारत लंबे समय से सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद से पीड़ित रहा है। साथ ही वैश्विक आतंकवादी संगठनों अलकायदा और आईएसआईएस के भी निशाने पर रहा है।

आतंकवादी हमलों को रोकने के लिए बहु एजेंसी केंद्र और इंटेलिजेंस ब्यूरो में संयुक्त कार्यबल का गठन किया गया है। साइबर सुरक्षा मजबूत की गयी है और आतंकवादी संगठनों द्वारा कट्टरवाद को बढ़ावा देने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल के खिलाफ कार्रवाई की गयी है।

मंत्रालय ने बताया है कि सुरक्षा और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में आधुनिक बनाया जा रहा है। संसाधनों की कमी की पहचान कर और जरूरी उपाय सुझाकर विभिन्न एजेंसियों की क्षमता बढ़ाई जा रही है।

मानवाधिकार को प्राथमिकता देते हुए किसी भी आरोपी को बहुस्तरीय कानूनी उपचार का अधिकार दिया जाता है।

नयी नीति में कहा गया है कि आतंकवादी समूह युवा भारतीयों को अपने जाल में फांसने के लिए लगातार प्रयास करते रहते हैं। इसे हतोत्साहित करने के लिए भारतीय खुफिया और कानून प्रवर्तन एजेंसियां सजग हैं। उन युवाओं की कट्टरता के अनुसार, उन पर कानूनी कार्रवाई की जाती है। साथ ही, सामाजिक और धार्मिक नेताओं, उपदेशकों तथा गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से कट्टरपंथ के बुरे परिणामों के बारे में जागरुकता फैलायी जाती है। विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से गरीबी और बेरोजगारी की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है ताकि युवाओं को भटकने के रोका जा सके।

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