नयी दिल्ली , फरवरी 14 -- केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली और मेरी कॉलेज के तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय 'संगणक (कंप्यूटर) प्रतिभा खोज कार्यशाला' का शनिवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया।

समापन के अवसर पर प्रतिभागियों द्वारा विकसित परियोजनाओं का प्रभावशाली प्रदर्शन किया गया और विशेषज्ञों द्वारा उनका मूल्यांकन किया गया। विद्यार्थियों ने संस्कृत ज्ञान और आधुनिक तकनीक के समन्वय पर आधारित नवाचारी मॉडल प्रस्तुत कर अपनी प्रतिभा और शोध क्षमता का परिचय दिया।

समापन सत्र में जगद्गुरु रामानंदाचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, राजस्थान के कुलपति प्रो. मदन मोहन झा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि अध्यक्षता केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने की। अपने संबोधन में प्रो. वरखेड़ी ने कहा कि अब समय आ गया है कि संस्कृत के मूल शास्त्रों के गहन ज्ञान को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के साथ समन्वित किया जाए। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने शास्त्रीय ज्ञान के आधार पर एआई को प्रशिक्षित करें और प्रश्नोत्तर के माध्यम से प्रमाणिक तथा संदर्भित जानकारी उपलब्ध कराएं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि "एआई साधन है, साध्य नहीं", अर्थात तकनीक का उद्देश्य शास्त्रीय ज्ञान की सेवा और संरक्षण होना चाहिए, उसका स्थान लेना नहीं। कुलपति ने प्रतिभागियों से उनकी अंतिम परियोजनाओं के विषय में जानकारी प्राप्त करते हुए उन्हें नवाचार और अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।

कुलसचिव प्रो. आरजी मुरलीकृष्ण ने विद्यार्थियों को शोध, नवाचार और तकनीकी उन्नयन की दिशा में निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा दी। मुख्य अतिथि प्रो. मदन मोहन झा ने कहा कि यह कार्यशाला संस्कृत और आधुनिक प्रौद्योगिकी के समन्वय की दिशा में विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता और दूरदर्शी सोच का सशक्त उदाहरण बनेगी।

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