नयी दिल्ली/कवरत्ती , मार्च 07 -- केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ.. जितेंद्र सिंह ने लक्ष्यद्वीप में समुद्र आधारित डीसैलीनेशन (समुद्री जल को पेयजल में बदलने) परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की।

श्री सिंह ने कवरत्ती में आयोजित बैठक में राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईओटी) के वैज्ञानिकों और अधिकारियों के साथ गहरे समुद्र से पाइपलाइन बिछाने तथा समुद्री तापीय डीसैलीनेशन प्रणालियों की स्थिति का आकलन किया।

समीक्षा बैठक में मंत्री ने द्वीपों में संचालित लो टेम्परेचर थर्मल डीसैलीनेशन (एलटीटीडी) यानी खारे समुद्री पानी को पीने योग्य मीठे पानी में बदलने की तकनीक संयंत्रों के कामकाज की जानकारी ली और कवरत्ती में विकसित किए जा रहे महासागरीय तापीय ऊर्जा रूपांतरण (ओटीईसी) आधारित डीसैलीनेशन संयंत्र की प्रगति पर भी चर्चा की।

इस अवसर पर श्री सिंह को अधिकारियों ने बताया कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत एनआईओटी द्वारा स्थापित एलटीटीडी संयंत्र वर्तमान में लक्ष्यद्वीप के आठ द्वीपों में संचालित हैं और वहां पेयजल का एक भरोसेमंद स्रोत उपलब्ध करा रहे हैं।

श्री सिंह को बताया गया कि लक्ष्यद्वीप जैसे द्वीप क्षेत्रों में सीमित भूजल, समुद्री खारे पानी के प्रवेश और वर्षा पर निर्भरता के कारण पेयजल की समस्या लंबे समय से बनी रही है। एलटीटीडी तकनीक समुद्र की सतह के गर्म पानी और लगभग 350 से 400 मीटर गहराई से लाए गए ठंडे समुद्री पानी के तापमान अंतर का उपयोग कर समुद्री जल को पेयजल में परिवर्तित करती है।

श्री सिंह ने संयंत्रों के संचालन और रखरखाव व्यवस्था की भी समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि इन संयंत्रों के संचालन में स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित मानव संसाधन का उपयोग किया जा रहा है, जिससे द्वीपों में सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता बढ़ी है और वर्षा जल संचयन पर निर्भरता कम हुई है।

बैठक में कवरत्ती में विकसित किये जा रहे देश के पहले ओटीईसी आधारित डीसैलीनेशन संयंत्र की प्रगति पर भी चर्चा हुई। इस परियोजना में समुद्र के प्राकृतिक तापीय अंतर का उपयोग कर एक साथ बिजली और पेयजल उत्पादन किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि संयंत्र का सिविल निर्माण लगभग पूरा हो चुका है और प्रमुख उपकरणों का निर्माण भी किया जा चुका है, जिनकी चरणबद्ध स्थापना की जा रही है।

परियोजना के तहत लगभग 3.8 किलोमीटर लंबी हाई-डेंसिटी पॉलीएथिलीन पाइपलाइन बिछाई जा रही है, जिसके माध्यम से एक हजार मीटर से अधिक गहराई से ठंडा समुद्री पानी लाया जाएगा। एनआईओटी के अधिकारियों ने बताया कि कवराट्टी लैगून के दक्षिणी हिस्से में पाइपलाइन के हिस्सों की वेल्डिंग का काम जारी है और अब तक करीब 250 मीटर पाइपलाइन को जोड़ा जा चुका है।

अधिकारियों के अनुसार, संयंत्र के चालू होने पर प्रतिदिन लगभग 100 घन मीटर पेयजल का उत्पादन किया जा सकेगा। यह संयंत्र डीजल आधारित बिजली पर निर्भर नहीं होगा, जिससे ईंधन पर निर्भरता कम होगी और द्वीपों की ऊर्जा तथा जल जरूरतों को दीर्घकालिक समाधान मिलेगा।

श्री सिंह ने समीक्षा के दौरान द्वीप और तटीय क्षेत्रों की विशिष्ट चुनौतियों के समाधान के लिए स्वदेशी समुद्री प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने परियोजना से जुड़े वैज्ञानिकों और इंजीनियरों से बातचीत की और इसके शेष चरणों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए।

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