देहरादून , फरवरी 07 -- केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शनिवार को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के एक होटल में संवाददाताओं से चर्चा में कहा कि इस वर्ष का केंद्रीय बजट एक ऐसी अर्थव्यवस्था के आत्मविश्वास और परिपक्वता को दर्शाता है, जिसमें 2014 से मौलिक बदलाव आया है।
श्री पुरी ने कहा कि बजट विकास को बढ़ावा देने और राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने के बीच एक सावधानीपूर्वक संतुलन बनाता है, जो भारत की "कमजोर पांच" देशों में गिने जाने से लेकर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और सबसे भरोसेमंद वैश्विक विकास कहानियों में से एक बनने तक की यात्रा को रेखांकित करता है।
उन्होंने कहा कि भारत की जीडीपी वृद्धि 7.4 प्रतिशत अनुमानित है, जो खपत और निवेश से प्रेरित है, जो लगातार चौथे वर्ष सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में भारत की स्थिति की पुष्टि करता है, जबकि वैश्विक विकास लगभग 3 प्रतिशत के आसपास है। उन्होंने वर्ष 2014 के बाद से हासिल किए गए तेज सुधार पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत ने 2025 में प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में मुद्रास्फीति में सबसे तेज कमी दर्ज की, जो लगभग 1.8 प्रतिशत थी। अप्रैल और दिसंबर 2025 के बीच, मुद्रास्फीति औसतन लगभग 1.7 प्रतिशत रही, जो कम खाद्य कीमतों, विशेष रूप से सब्जियों और दालों के कारण थी। उन्होंने बताया कि भारत में मुद्रास्फीति का स्तर कई उन्नत और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि 2026-27 में कुल पूंजीगत व्यय लगभग Rs.12.2 लाख करोड़ है, जो 2013-14 की तुलना में 430 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस अवधि के दौरान राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए आवंटन में लगभग 500 प्रतिशत, रक्षा में 210 प्रतिशत से अधिक, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण में लगभग 176 प्रतिशत और शिक्षा में 110 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च एक प्रमुख विकास इंजन बन गया है, जिसमें राष्ट्रीय राजमार्ग विकास पर खर्च किए गए हर रुपये से GDP में Rs.3.2 की बढ़ोतरी होती है।
रक्षा और रणनीतिक क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर देते हुए केंद्रीय मंत्री श्री पुरी ने कहा कि 2014 से लगातार निवेश ने आयात पर निर्भरता कम करने में मदद की है। साथ ही आत्मनिर्भरता विजन के अनुरूप स्वदेशी रक्षा विनिर्माण में तेजी लाई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पिछले एक दशक में भारत के विकास पथ में मानव पूंजी विकास प्रमुख रहा है। 2014 से, आईआईटी की संख्या 16 से बढ़कर 23, आईआईएम की 13 से 21, एम्स की 7 से 23 और मेडिकल कॉलेजों की 387 से 819 हो गई है। उन्होंने कहा कि अब भारत के ज़ांज़ीबार और अबू धाबी में अंतरराष्ट्रीय आईआईटी कैंपस हैं, जो भारत के शिक्षा इको सिस्टम की वैश्विक पहचान को दर्शाता है।
श्री पुरी ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 2014 में लगभग 91,000 किमी से बढ़कर 2026 में लगभग 1.46 लाख किमी हो गई है, जबकि मेट्रो नेटवर्क 248 किमी से बढ़कर 1,000 किमी से अधिक हो गया है। उन्होंने बताया कि हवाई अड्डों की संख्या 70 से बढ़कर लगभग 160 हो गई है, जो दोगुनी से भी ज़्यादा है। अकेले पिछले पांच वर्षों में, 57,000 किमी से अधिक राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया गया है, जिससे सालाना लगभग 33 करोड़ व्यक्ति-दिन का रोजगार पैदा हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि आज 164 से अधिक वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें चल रही हैं। 260 स्लीपर ट्रेनसेट की योजना है और सात नए घोषित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को स्वदेशी तकनीकें हमारे देश को ताकत देंगी।
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