रायपुर , फरवरी 01 -- केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति दो ध्रुवों में बंट गई है। राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बजट को 'विकसित भारत की दिशा में ऐतिहासिक कदम' बताया है, जबकि विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे 'कटौती का जनविरोधी बजट' करार दिया है। इससे बजट पर राज्य में नई बहस छिड़ गई है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 1 फरवरी को जारी एक विस्तृत बयान में बजट की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह बजट 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र को केंद्र में रखते हुए तैयार किया गया है, जो गरीब, किसान, युवा और महिला सशक्तिकरण के लिए मील का पत्थर साबित होगा। साय ने विशेष रूप से कृषि में एआई तकनीक, बायोफार्मा के लिए 10 हजार करोड़ रुपये के प्रावधान, हर जिले में ट्रॉमा सेंटर, लखपति दीदी योजना के विस्तार और सेमीकंडक्टर मिशन जैसी घोषणाओं का स्वागत किया। उनका कहना था कि इनसे छत्तीसगढ़ समेत पूरे देश को सीधा लाभ मिलेगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

वहीं, दूसरी ओर, कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर बजट पर निशाना साधा। 01 फरवरी को एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, "ये बजट शेखचिल्ली का शोरबा है। सरकार शेखी बघारती रही कि देश विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया, पर इस बजट ने सच्चाई की कलई खोल दी।" बघेल ने आरोप लगाया कि यह बजट महज धुंआधार बयानबाजी है, जिसमें धुंआ ज्यादा और धार पतली है।

श्री बघेल ने बजट में जनकल्याणकारी योजनाओं में कथित कटौती को उजागर करते हुए कहा, "स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक विकास से लेकर ग्रामीण विकास तक हर क्षेत्र में कटौती ही कटौती है। फसल बीमा, यूरिया सब्सिडी, गरीब कल्याण अन्न योजना और उज्ज्वला गैस योजना के फंड काटे गए हैं। ओबीसी, अनुसूचित जाति और जनजाति कल्याण तक के बजट घटा दिए गए हैं, बच्चों की छात्रवृत्ति तक कम कर दी गई है।" उन्होंने बजट में महंगाई और बेरोजगारी जैसे ज्वलंत मुद्दों पर ठोस रणनीति के अभाव पर भी सवाल खड़े किए।

मुख्यमंत्री साय के बयान और पूर्व मुख्यमंत्री बघेल की आलोचना ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ में बजट के क्रियान्वयन और उसके जमीनी प्रभाव को लेकर राजनीतिक वाद-विवाद जारी रहेगा।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित