पटना , फरवरी 02 -- बिहार के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने सोमवार को कहा कि कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र बिहार की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, जो राज्य की अधिकांश ग्रामीण आबादी को आजीविका उपलब्ध कराते हैं तथा सकल राज्य मूल्यवर्धन में लगभग एक-चौथाई का योगदान देते हैं।

श्री यादव ने आज बयान जारी कर कहा कि अवसंरचनात्मक चुनौतियों और कृषि-जलवायु संबंधी जोखिमों के बावजूद, सतत सार्वजनिक निवेश और दूरदर्शी नीतिगत सुधारों के कारण कृषि क्षेत्र में निरंतर प्रगति दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा लागू चतुर्थ कृषि रोडमैप (2023-28) का उद्देश्य किसानों को आय संबंधी सुरक्षा प्रदान करना, उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि करना तथा कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाना है। इस रोडमैप के तहत फसल उत्पादन, बागवानी, पशुपालन, डेयरी, मत्स्यिकी एवं अन्य संबद्ध गतिविधियों को राज्य योजनाओं और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के समन्वय से मजबूती दी जा रही है।

कृषि मंत्री ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन एवं वितरण, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत सिंचाई का विस्तार, कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन के माध्यम से आधुनिक यंत्रों का उपयोग, तथा बिहार कृषि निवेश प्रोत्साहन नीति के तहत निजी निवेश को बढ़ावा जैसे प्रमुख हस्तक्षेपों से कृषि की उत्पादक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि समेकित बागवानी विकास मिशन एवं फसल आधारित योजनाओं के कारण बागवानी एक सशक्त एवं उभरते हुए उप-क्षेत्र के रूप में विकसित हुई है।

श्री यादव ने बताया कि कृषि एवं संबंधित क्षेत्र को योजना सहित विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से सुदृढ़ किया जा रहा है। पूरक उपायों के अंतर्गत वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच कृषि विद्युत सब्सिडी में 99.3 प्रतिशत की वृद्धि, किसान क्रेडिट कार्ड धारकों में 16.3 प्रतिशत की वृद्धि के साथ ऋण वितरण 9,399.24 करोड़ रुपये तक पहुंचना तथा वर्ष 2024-25 में सिंचाई क्षेत्र में 2,729.83 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है।उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन समग्र प्रयासों से कृषि क्षेत्र का सुदृढ़ीकरण होगा और राज्य के किसानों की आय एवं जीवन स्तर में निरंतर सुधार सुनिश्चित किया जाएगा।

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