दरभंगा , दिसम्बर 05 -- राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त इतिहासकार एवं बंसीलाल विश्वविद्यालय, हिसार के प्रोफेसर रविप्रकाश ने शुक्रवार को कहा कि कुषाण, गुप्त आदि वंशों ने भारतीय संस्कृति को वैश्विक स्वरूप दिया।

प्रोफेसर रवि प्रकाश ने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर इतिहास विभाग में शुक्रवार को "वर्तमान परिप्रेक्ष्य में इतिहास- लेखन एवं चिंतन की प्रासंगिकता" विषय पर आयोजित एक-दिवसीय विशेष व्याख्यान को संबोधित करते हुए इतिहास की व्यापकता और उसकी बदलती व्याख्याओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न की कथा हमें केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना का संदेश भी देती हैं। सिंधु सभ्यता, राखीगढ़ी, सरस्वती सभ्यता जैसे पुरातात्विक साक्ष्यों ने इतिहास - लेखन में नई संभावनाओं को खोला है साथ ही भारतीय उपमहाद्वीप में मानव प्रवासन के अध्ययन ने इतिहास की रिक्तता को भरने का कार्य भी किया है। विश्व इतिहास की अवधारणा ने इतिहास को अधिक समावेशी और बहु-दृष्टिगत बनाया है।

प्रो.रवि ने चिरांद, पाषाण काल और बृहत्तर भारत की संकल्पना पर भी विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक इतिहास-लेखन में इन पहलुओं को नए तरीके से देखने की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि इतिहास को केवल अतीत की कहानी के रूप में नहीं, बल्कि वर्तमान की समझ और भविष्य की दिशा के रूप में देखें।

व्याख्यान में बतौर मुख्य वक्ता बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर के सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष प्रो. भोज नंदन प्रसाद सिंह ने अपने गहन, सहज और प्रेरक विचारों से संबद्ध विषय पर विचार रखें। उन्होंने अपनी वाक् शैली को छोटे-छोटे प्रेरक किस्सों से शुरू किया, जिसने श्रोता वर्ग को गंभीरता और रोचकता से बांध दिया। उन्होंने बताया कि मूलतः इतिहास चिंतन यात्रा की शुरुआत ई.एच. कार की प्रसिद्ध पुस्तक 'इतिहास क्या है?' से हुई है। इतिहास केवल डेटा का संग्रह नहीं है, बल्कि मानव जीवन के हर पहलू को समझने की कला है। यह सभी विषयों की जननी है, क्योंकि प्रत्येक विषय समय और समाज से प्रभावित होता है। सार्थक इतिहास अध्ययन वही है, जो मानव को केवल 'मानव' ही नहीं, बल्कि 'दैवीय संपदा से सम्पन्न' जीव के रूप में देखने की दृष्टि दे।

स्नातकोत्तर इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो.संजय झा ने व्याख्यान में अपने अध्यक्षीय संबोधन देते हुए कहा कि इतिहास केवल अतीत की खोज नहीं, बल्कि मानव सभ्यता का दर्पण है। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में इतिहास का कार्य समाज को दिशा देना है, केवल जानकारी देना नहीं।

मंच संचालन डॉ. मनीष कुमार और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ज्योति प्रभा ने किया। व्याख्यान में विषय प्रवेश डॉ.अमिताभ कुमार ने किया। इस अवसर पर विभागीय प्राध्यापक प्रो. नैयर आज़म, डॉ. अमीर अली खान समेत बड़ी संख्या में शोधार्थी एवं छात्र- छात्राएँ उपस्थित रहीं।

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