नयी दिल्ली , अप्रैल 24 -- फसलों को नुकसान पहुँचाने वाले कीट-पतंगों और खरपतवार नियंत्रक रसायनों का कारोबार करने वाली प्रमुख कंपनियों के मंच क्रॉपलाइफ इंडिया ने सिफारिश की है कि कीटनाशक प्रबंधन विधेयक-2025 के मसौदे में नए कृषि रसायनों के व्यवसायीकरण, पंजीकरण या उनके नए उपयोग की अनुमति के लिए कंपनी की ओर से नियमों के तहत प्रस्तुत डेटा को पाँच साल तक केवल उसी कंपनी के उपयोग के लिए संरक्षित रखने का प्रावधान किया जाए।
क्रॉपलाइफ इंडिया के अध्यक्ष और क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर अंकुर अग्रवाल ने इस प्रावधान को भारत के कृषि और कृषि रसायन उद्योग के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए शुक्रवार को यहाँ एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि नियामकीय डेटा संरक्षण न होने के कारण बहुत से आवश्यक नए कीटनाशकों को भारत में लाने में कंपनियाँ उदासीन बनी हुई हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी नए कृषि रसायन को भारतीय बाजार में लाने के लिए पंजीकरण कराना होता है और नियमों के अनुसार उसके प्रभावी गुणों, सुरक्षा, अवशेष की स्थिति और पर्यावरण पर प्रभाव के लिए खेतों में कम से कम छह-सात साल तक परीक्षण और प्रयोग चलते हैं। नियम के तहत इससे उत्पन्न डेटा को व्यावसायिक पंजीकरण और नए प्रयोग के लिए बोर्ड के समक्ष जमा कराना पड़ता है। इस डेटा का उपयोग एक सीमित समय तक केवल उसी कंपनी के अधिकार में रहना चाहिए।
श्री अग्रवाल ने कहा, "क्रॉपलाइफ इंडिया ने कीटनाशक और उसके नए उपयोगों के लिए समयबद्ध नियामक डेटा संरक्षण ढांचे को शामिल करने की मांग की है, जो विधेयक के मसौदे में शामिल नहीं है। हम चाहते हैं कि पहले पंजीकरण के लिए नियामकीय डेटा पर पाँच साल का संरक्षण मिले। इस दौरान किसी अन्य आवेदक को पहले आवेदक की अनुमति के बिना उस डेटा का सहारा लेने की छूट न दी जाए और वह इस संबंध में अपना खुद का डेटा सृजित और प्रस्तुत करे।"उल्लेखनीय है कि सरकार ने 1968 के कीटनाशक अधिनियम की जगह नया कानून बनाने के लिए नए कीटनाशक प्रबंधन विधेयक-2025 का मसौदा इस साल 7 जनवरी को सार्वजनिक सुझावों और टिप्पणियों के लिए जारी किया था। श्री अग्रवाल ने बताया कि देश में 70 प्रतिशत कृषि रसायन बाजार का प्रतिनिधित्व करने वाली क्रॉपलाइफ इंडिया ने 3 फरवरी को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय को अपना विस्तृत सुझाव प्रस्तुत कर दिया है।
क्रॉपलाइफ इंडिया ने इस विधेयक में पंजीकरण दस्तावेजों के साथ नियामक को दी गई गोपनीय व्यापारिक सूचनाओं की गोपनीयता के संरक्षण, कीटनाशकों की संवेदनशीलता को देखते हुए इनकी ऑनलाइन बिक्री के कठोर नियमन तथा कंपनी की किसी उत्पादन, भंडारण सुविधा या शाखा में नियम विरुद्ध किसी कार्य के लिए उस सुविधा के लिए कंपनी द्वारा नामित व्यक्ति को ही कानून के तहत उत्तरदायी बनाने का प्रावधान किए जाने की सिफारिश की है। इससे उन निदेशकों पर अंधाधुंध मुकदमे नहीं किए जा सकेंगे जिनकी परिचालन कार्यों में कोई भूमिका नहीं है।
फोरम ने यह भी सिफारिश की है कि किसी कीटनाशक पर आपातकालीन प्रतिबंध की अवधि 60 से 120 दिनों तक सीमित हो और अनिवार्य वैज्ञानिक समीक्षा की व्यवस्था हो। विधेयक के मसौदे में एक वर्ष तक की पाबंदी का प्रस्ताव है।
संगठन ने कीटनाशक रसायनों के नमूने लेने, संक्रमण काल में विभिन्न चरणों में उस नमूने को रखने की जिम्मेदारी, परीक्षण में लगने वाले समय और दोबारा परीक्षण के प्रावधान को कानून का ही हिस्सा बनाए जाने की सिफारिश की है। इस संबंध में अनुपातिक दंड और वैधानिक सुरक्षा उपायों की भी सिफारिश की गई है।
क्रॉपलाइफ इंडिया का कहना है कि भारत का कीटनाशक नियामक ढांचा आज भी कीटनाशक अधिनियम, 1968 पर टिका है, जबकि खेती की जमीनी हकीकत काफी बदल चुकी है। हर साल कीटों और बीमारियों से 10 से 35 प्रतिशत तक फसल का नुकसान होता है, जिससे दो लाख करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान होता है। फिर भी किसान तीन-चार दशक पुराने अणुओं पर निर्भर हैं, जबकि जलवायु परिवर्तन, बढ़ती प्रतिरोधकता और बदलते कीट व्यवहार के चलते फसल उत्पादकता पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
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