जमुई , जनवरी 29 -- बिहार में जमुई जिले के बरहट प्रखंड अंतर्गत कटौना गांव के किसान योगेंद्र पंडित ने दक्षिण अफ्रीका और स्कॉटलैंड जैसे देशों में होने वाले काला आलू को अब जमुई की उपजाऊ मिट्टी में भी सफलतापूर्वक उगाया है। इस अनोखी खेती ने न केवल इलाके में चर्चा पैदा की है,बल्कि आसपास के किसानों के लिए नई उम्मीद भी जगाई है।
काला आलू अपने विशेष औषधीय गुणों के कारण दुनियाभर में पहचाना जाता है।इसमें सामान्य आलू की तुलना में अधिक एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं,जो इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायक होते हैं।इसके अलावा कई बीमारियों के उपचार में भी इसका उपयोग किया जाता है।औषधीय महत्व के कारण ही बाजार में काले आलू की कीमत सामान्य आलू से कहीं अधिक होती है।जहां आम आलू 20 रुपये प्रति किलो तक बिकता है,वहीं काला आलू इससे चार गुना अधिक कीमत पर बिकने की संभावना रखता है।
किसान योगेंद्र पंडित ने बताया कि उन्हें काला आलू की खेती की जानकारी यूट्यूब और सोशल मीडिया के माध्यम से मिली।उन्होंने कहा कि जब उन्हें यह पता चला कि बिहार या जमुई के इलाके में इसकी खेती नहीं हो रही है,तो उन्होंने इसे प्रयोग के तौर पर अपने खेत में उगाने का फैसला किया।शुरुआत में जोखिम जरूर था,लेकिन मेहनत और सही देखभाल से फसल ने उम्मीद से बेहतर परिणाम दिया।
किसान योगेंद्र पंडित ने बताया कि वे पहले से ही कुफरी नीलकंठ और कुफरी संगम जैसी उन्नत किस्मों के आलू की खेती करते आ रहे हैं,लेकिन काला आलू उन्हें इसलिए खास लगा क्योंकि इसमें औषधीय गुणों का खजाना है। खेती शुरू करने के बाद उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण भी लिया, जिससे तकनीकी जानकारी और मार्गदर्शन मिला।इस वर्ष उन्होंने मात्र एक से दो कट्ठा जमीन में काला आलू की खेती की है, लेकिन उपज काफी अच्छी हुई है। अब वे आने वाले समय में इसे बड़े पैमाने पर उगाने की योजना बना रहे हैं।साथ ही आसपास के कई किसान भी इस नई खेती को अपनाने की तैयारी में हैं। काला आलू की यह पहल जमुई ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार में खेती की दिशा बदलने वाली साबित हो सकती है।
उद्यान पदाधिकारी शिवाजी हेंब्रम ने बताया कि औषधीय गुणों से भरपूर काले आलू की खेती किसान योगेंद्र पंडित ने फिलहाल छोटे पैमाने पर की है। इसकी खेती, बाजार मूल्य और फीडबैक की मॉनिटरिंग की जा रही है। अच्छा फीडबैक मिलने पर किसानों को काला आलू की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
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