हरिद्धार , दिसंबर 11 -- आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक ईजाद की है जिससे किसान अपनी खेत की मिट्टी में कार्बन की मात्रा बढ़ाकर अपनी आय को बढ़ा सकेंगे। यह तकनीक किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ उनकी खेती की लागत को कम करने तथा सिंचाई की आवश्यकता को कम करने में गेम चेंजर साबित हो सकती है । यह कार्बन क्रेडिट मॉडल फिलहाल आईआईटी रुड़की उत्तर प्रदेश सरकार के साथ मिलकर चलाएगी बाद में इस पूरे देश में लागू किया जाएगा ।

आईआईटी रुड़की के भू गर्भ विज्ञान के प्रोफेसर ए एस मौर्य ने संवाददाता को बताया कि यह कार्बन क्रेडिट मॉडल फिलहाल उत्तर प्रदेश में शुरू किया जा रहा है।

उन्होंने इस मॉडल के बारे में बताया कि किसान अपनी फसल के बाद बची हुई सामग्री जैसे गेहूं , धान की पराली गन्ने की पत्तियों और अन्य फसलों की वेस्ट जला देते हैं जिससे पर्यावरण प्रदूषण होता है और किसानों के स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पड़ता है । इस तकनीक के तहत किसानों को इस बारे में शिक्षित किया जाएगा कि वह फसलों के बाद निकलने वाली बेकार सामग्री को ना जलाएं बल्कि उसे खेतों में ही रहने दे इससे जहां उनकी मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ेगी वही मिट्टी में कार्बन की मात्रा बढ़ने से खेतों में पानी की भी कम आवश्यकता पड़ेगी और कम पानी से ही अच्छी फसल पैदा होगी। विशेष बात यह है कि उन्हें अपने खेतों की कम से कम जुताई करके अधिक से अधिक फसल प्राप्त होगी।

श्री मौर्य ने बताया कि इस प्रणाली को अपनाने के बाद हर दो-तीन वर्ष बाद मिट्टी की जांच होगी और उसमें कार्बन की मात्रा को मापा जाएगा जिसे एक टन कार्बन को एक क्रेडिट माना जाएगा और जिसकी बिक्री के लिए देश में नहीं विदेश में भी कई एजेंसियां तैयार है । वह इसकी गुणवत्ता की जांच करके इसे खरीदने में सक्षम होगी ।

यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप डिजिटल मॉनिटरिंग, रिपोर्टिंग और वेरिफिकेशन (डी.एम.आर.वी.) प्रणाली का उपयोग करेगा। न्यूनतम जुताई, कवर क्रॉपिंग, अवशेष प्रबंधन, कृषि-वनीकरण तथा उन्नत बायो-फर्टिलाइज़र प्रयोग जैसी प्रक्रियाओं से मृदा कार्बन वृद्धि तथा खेत-स्तरीय ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में कमी को वैज्ञानिक रूप से मापा जाएगा तथा इन मूल्यों को सत्यापित कार्बन क्रेडिट में परिवर्तित किया जाएगा। इन क्रेडिट की बिक्री से प्राप्त आय सीधे किसानों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जाएगी।

उन्होंने बताया कि कार्यक्रम का प्रारम्भ सहारनपुर मंडल से होगा, जिसमें प्रतिवर्ष बड़े पैमाने पर कार्बन क्रेडिट उत्पन्न करने की प्रबल क्षमता है। आईआईटी रुड़की किसानों, कार्बन मार्केट तथा वैश्विक खरीदारों के मध्य आवश्यक संपर्क भी स्थापित करेगा। उद्योग के लिए यह कार्यक्रम पारदर्शी रूप से मापित, वैज्ञानिक रूप से सत्यापित एवं उच्च गुणवत्ता वाले कार्बन क्रेडिट उपलब्ध कराता है। प्रधानमंत्री के 2070 तक भारत को कार्बन उत्सर्जन में नेट-जीरो प्रतिबद्धताओं को आगे बढ़ाने के साथ-साथ पुनर्योजी कृषि और ग्रामीण आजीविका को भी बढ़ावा मिलेगा।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित