भोपाल , फरवरी 5 -- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों को सशक्त बनाने और कृषि व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप देने के लिए राज्य सरकार तकनीक का प्रभावी उपयोग कर रही है। एआई आधारित डिजिटल क्रॉप सर्वे और फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से प्रदेश में पारदर्शी, प्रमाणिक और भरोसेमंद कृषि डेटा प्रणाली स्थापित की गई है, जिससे किसानों को योजनाओं का वास्तविक लाभ सुनिश्चित हो सकेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे के तहत खेत पर उपस्थित होकर फसल की फोटो लेकर जानकारी सुरक्षित की जा रही है, जिससे फसल से जुड़ा डेटा पूरी तरह प्रमाणिक बन रहा है। जियो-फेंसिंग तकनीक के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सर्वे केवल वास्तविक खेत स्थल पर ही हो। सर्वे डेटा का त्रिस्तरीय सत्यापन एआई/एमएल सिस्टम और पटवारी स्तर पर किया जा रहा है। इसी डेटा के आधार पर उपार्जन पंजीयन सहित अन्य विभागीय कार्यों में भी उपयोग किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि इंटरनेट उपलब्ध न होने की स्थिति में भी सर्वे की विश्वसनीयता बनाए रखने की व्यवस्था की गई है। सर्वे के दौरान ली गई फोटो की प्रामाणिकता और सही लोकेशन की पुष्टि स्वतः प्रणाली द्वारा होती है। सर्वे केवल निर्धारित समयावधि में ही संभव है और समय सीमा के बाहर या मोबाइल समय में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ होने पर सर्वे स्वतः रुक जाता है। एआई और एमएल एल्गोरिदम के माध्यम से डेटा का क्रॉस-वेरिफिकेशन कर मानवीय त्रुटियों की संभावना न्यूनतम की गई है। इसके आधार पर फसल क्षेत्र, उत्पादन अनुमान और योजनाओं के क्रियान्वयन में डेटा आधारित निर्णय लिए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि फार्मर रजिस्ट्री को एकीकृत डिजिटल प्रणाली के रूप में विकसित किया गया है, जिसमें किसानों की पहचान, भूमि विवरण और योजना संबंधी जानकारी का केंद्रीकृत पंजीकरण और सत्यापन किया जा रहा है। भूमि अभिलेखों का पूर्ण डिजिटल एकीकरण, स्थान आधारित रिकॉर्ड और बहु-स्तरीय डेटा जांच इस प्रक्रिया का हिस्सा है। प्रत्येक किसान को 11 अंकीय विशिष्ट डिजिटल पहचान संख्या प्रदान की जा रही है, जिससे एक सटीक और प्रमाणिक यूनिफाइड डिजिटल प्रोफाइल तैयार हो रही है।
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