लखनऊ , फरवरी 5 -- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस के कारण उत्तर प्रदेश में कृषि ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी तरह बदल गई है। पहले किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से ऋण पाने में 25 दिन से एक महीने तक का समय लगता था, लेकिन अब ई-केसीसी के जरिए किसान मात्र पांच मिनट में ऋण सुविधा प्राप्त कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री गुरुवार को लोकभवन में आयोजित राज्य ऋण संगोष्ठी एवं राज्य फोकस पेपर 2026-27 के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए प्रदेश का कृषि ऋण लक्ष्य 3 लाख करोड़ रुपये तय किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 13 प्रतिशत अधिक है।
योगी ने कहा कि आज सरकार और किसान मिलकर खेती में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग पर काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से केंद्रीय बजट में एआई एग्रीकल्चर प्लेटफॉर्म की घोषणा की गई है और उत्तर प्रदेश इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कई फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (एफपीओ) को सम्मानित भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिव्यांगजनों द्वारा संचालित कसया मिल्क प्रोड्यूसर एफपीओ (1005 सदस्य) और मथुरा की 750 महिलाओं वाली सरसों उत्पादक कंपनी पूरे प्रदेश के लिए रोल मॉडल हैं। महिलाओं ने प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन के जरिए बेहतर मुनाफा कमाया है। सरकार ऐसे प्रयासों को हर स्तर पर सहयोग देगी।
योगी ने कहा कि "सहकार से समृद्धि" के विजन के तहत सहकारिता क्षेत्र में डिजिटलीकरण से पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है। उन्होंने बताया कि 2017 से पहले बंद होने की कगार पर खड़े 16 जिला सहकारी बैंकों में से 15 आज मुनाफे में हैं।
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