वाराणसी , मार्च 2 -- पूरी दुनिया की निगाहें इस समय ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच छिड़े तनाव पर टिकी हुई हैं। सोमवार को वहीं, काशी में मुस्लिम महिलाओं ने रंगों और गुलालों से होली खेलकर विश्व शांति का संदेश दिया।

मुस्लिम महिला फाउंडेशन एवं विशाल भारत संस्थान के संयुक्त तत्वाधान में लमही स्थित सुभाष भवन में गुलालोत्सव का आयोजन किया गया। ढोल की थाप पर होली के गीत, हँसी-ठिठोली और हवाओं में उड़ता गुलाल किसी भी धार्मिक नफरत को मिटाने की ताकत रखता है। मुस्लिम देश धार्मिक नफरत के शिकार हैं और एक-दूसरे को खत्म करने पर आमादा नजर आते हैं। सड़कों पर बिखरा खून इतिहास और भूगोल सब बदल रहा है।

काशी की मुस्लिम महिलाओं ने होली खेलकर नफरत, हिंसा और कट्टरता को मिटाने तथा विश्व शांति का संदेश देने का प्रयास किया। महिलाओं ने कहा कि काश मुस्लिम देश भी होली मनाते, तो गले मिलने की उम्मीद जगती। भारत की संस्कृति रंगों की होली खेलकर गले मिलने का संदेश देती है, जबकि कुछ जगहों पर गला काटकर खून की होली को ही मजहब का हिस्सा माना जाता है।

हिंदू महिलाओं ने अपने हाथों से मुस्लिम महिलाओं के चेहरे पर गुलाल लगाया, तो मुस्लिम महिलाएं भी पीछे नहीं रहीं। उन्होंने हवा में गुलाल उड़ाकर सबको रंग-बिरंगा कर दिया। गुलालोत्सव एवं होली की पोटली कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बड़कू हनुमान जी आश्रम के पीठाधीश्वर पंडित रिंकू महाराज ने अनाज बैंक की ओर से 300 बांसफोर, नट, मुसहर और मुस्लिम परिवारों की महिलाओं को होली की पोटली तथा साड़ियाँ वितरित कर उत्सव की खुशी बढ़ाई।

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