वाराणसी , जनवरी 30 -- बनारस लिटरेचर फेस्टिवल के चौथे संस्करण में शुक्रवार को नदेसर स्थित होटल ताज के सुर प्रवाह प्रांगण में जब भोजपुरी गायक, अभिनेता और सांसद मनोज तिवारी मंच पर आए, तो पूरा माहौल भोजपुरी माटी की सुगंध से सराबोर हो गया। लोक-सुर, स्मृतियाँ और संवाद-तीनों का ऐसा सधा संगम बना कि श्रोता झूमते-गुनगुनाते रहे।
मनोज तिवारी ने गायन की शुरुआत शिवभक्ति से की "हर हर महादेव, हे तीनों लोक के देवा, हे देवों के देवा."। इन पंक्तियों के साथ ही काशी की आत्मा जैसे सुरों में उतर आई। इसके बाद 'ए राजा जी.' और चर्चित 'रिंकिया के पापा.' ने सभागार को तालियों और मुस्कानों से भर दिया।
गीतों के बीच-बीच में श्रोताओं से आत्मीय संवाद करते हुए उन्होंने जेन जी का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "आप चाहे जिस गांव या क्षेत्र से हों, अपने लोक-संगीत से जुड़ाव बनाए रखें। उसमें नया प्रयोग करने और उसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी युवाओं के कंधों पर है।"संवाद के दौरान उन्होंने सहज हास्य के साथ कहा, "अब मेरी अंग्रेजी ठीक हो गई है," जिस पर सभागार ठहाकों से गूंज उठा। वहीं 'रिंकिया के पापा' गीत के पीछे के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए उन्होंने लोकगीतों की सामाजिक भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
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