वाराणसी , दिसंबर 17 -- धार्मिक नगरी काशी में मंदिरों और मठों पर नगर निगम द्वारा टैक्स लगाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पातालपुरी मठ, नरहीपुरा में बुधवार को निगम के फैसले से नाराज दर्जनों साधु-संतों ने एकत्र होकर अपनी नाराजगी व्यक्त की और धरना दिया।

जगद्गुरु बालकदेवाचार्य ने बताया कि नगर निगम द्वारा नोटिस भेजकर टैक्स वसूलने की बात कही गई है। काशी के साधु-संत इस फैसले को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। निगम फैसला तुरंत वापस ले।

महंत जगदीश्वर दास ने बताया कि पिछले कई दिनों से नगर निगम वाराणसी द्वारा काशी के मठों और मंदिरों को गृह कर, जल टैक्स तथा भूमि टैक्स के नोटिस दिए जा रहे हैं। दूसरी ओर मस्जिदों, मदरसों से कोई टैक्स नहीं लिया जाता। मौलवियों को वेतन दिया जाता है। जहां सनातन धर्म एवं संस्कृति से जुड़े कार्य होते हैं, जहां संस्कृत शिक्षा तथा वेदों की शिक्षा दी जाती है, वहां टैक्स लगाया जा रहा है। सरकार खामोश है। कुछ अधिकारी सरकार की नीतियों को बदनाम करना चाहते हैं। निगम को तीन दिन का समय दिया गया है, अन्यथा देश भर में आंदोलन होगा।

संत कृष्ण देवदास जी ने कहा कि पंद्रह दिनों में कर चुकता करने को कहा गया है। संत भिक्षाटन करते हैं और ठाकुरजी को भोग-प्रसाद चढ़ाते हैं। काशी विश्वनाथ धाम बनने के बाद भारत के कोने-कोने से साधु-संत-महात्मा आते हैं। वे भी मठों में ठहरते हैं। उनकी व्यवस्था मठ की ओर से होती है। अब निगम टैक्स लगा रहा है तो सभी जगह नाराजगी बढ़ रही है।

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